
देहरादून: उत्तराखंड क्रांति दल आज से राज्यभर में “घर-घर पर्चा, हर घर चर्चा” अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती के अनुसार, अभियान का शुभारंभ देहरादून स्थित केंद्रीय कार्यालय से किया जाएगा। यह जनसंपर्क अभियान पूरे एक वर्ष तक चलेगा, जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता से संवाद करेंगे और जल, जंगल, जमीन, पलायन, रोजगार और स्थाई निवास जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। जल, जंगल और जमीन जैसे मूल सवालों के साथ-साथ पलायन और रोजगार राज्य की बड़ी चुनौतियां मानी जाती हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल जनसंपर्क के माध्यम से जनता की राय जानने और संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
अभियान की रूपरेखा
दल के केंद्रीय अध्यक्ष के अनुसार “घर-घर पर्चा, हर घर चर्चा” अभियान के लिए राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में कार्यकर्ताओं की टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें गांवों और शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों से सीधा संवाद करेंगी और पार्टी के विचारों व मुद्दों को साझा करेंगी।
जल, जंगल और जमीन पर फोकस
अभियान के दौरान कार्यकर्ता जनता से जल, जंगल और जमीन से जुड़े सवालों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही राज्य गठन के बाद उत्तराखंड ने क्या खोया और क्या पाया, इस विषय पर भी लोगों से बातचीत की जाएगी, ताकि जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति को समझा जा सके।
पलायन और रोजगार प्रमुख मुद्दे
उत्तराखंड क्रांति दल के अनुसार पलायन, रोजगार और स्थाई निवास जैसे विषय अभियान के केंद्र में रहेंगे। कार्यकर्ता इन मुद्दों पर जनता की समस्याएं और सुझाव सुनेंगे और उन्हें पार्टी के स्तर पर आगे रखने का दावा कर रहे हैं।
घर-घर पहुंचेगा पर्चा
अभियान के तहत दल द्वारा तैयार किए गए पर्चे घर-घर तक पहुंचाए जाएंगे। इन पर्चों के माध्यम से पार्टी अपनी नीतियों, विचारों और राज्य से जुड़े मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि घर-घर संपर्क अभियान से दल को जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलेगा। वहीं, आम लोगों को भी सीधे संवाद के जरिए अपनी बात रखने का मंच मिलेगा।
आगे क्या होगा
उत्तराखंड क्रांति दल के अनुसार यह अभियान एक साल तक चलेगा। इस दौरान मिले सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी और संगठनात्मक गतिविधियों को विस्तार देगी।







