
देहरादून: काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या को लेकर प्रदेश की राजनीति लगातार गरमाई हुई है। सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मामले में भाजपा सरकार और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था के नैतिक पतन और सत्ता के अहंकार का जीवंत प्रमाण है। कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय देहरादून में मीडिया से बातचीत करते हुए यशपाल आर्य ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने 10 जनवरी को नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो जारी कर प्रॉपर्टी डीलरों और कुछ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो सामने आने के बाद मामला राज्यभर में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया। अब तक कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और 26 लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो चुका है।
यशपाल आर्य का बयान
यशपाल आर्य ने कहा कि यह घटना आत्महत्या नहीं, बल्कि पुलिस-प्रशासन की प्रताड़ना और सत्ता के संरक्षण में पनप रहे भू-माफियाओं का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान ने आत्महत्या से पहले वीडियो के माध्यम से अपनी पीड़ा साफ तौर पर बताई थी, जिसमें उसने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से लेकर थाना स्तर तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। आर्य के अनुसार, जब एक किसान के सामने न्याय के सारे दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, तो वह खुद को पूरी तरह बेबस महसूस करता है।
सरकार पर गंभीर आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भू-माफिया और शराब माफिया के साथ सरकार का गठजोड़ बन चुका है और पुलिस अपने दायित्वों से हटकर इन तत्वों के संरक्षण में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा मजिस्ट्रेट जांच के आदेश देना केवल औपचारिकता है और इससे सरकार अपने अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस की मांग
यशपाल आर्य ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
पिता का दर्द
मृतक के पिता तेजा सिंह ने बताया कि उनकी जमीन एक फैक्ट्री प्रोजेक्ट में जाने के बाद उन्हें करीब 4 करोड़ 70 लाख रुपये मिले थे। इसी रकम से उन्होंने सात एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन प्रॉपर्टी डीलरों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके साथ धोखाधड़ी की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस से शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उनका बेटा मानसिक तनाव में आ गया।
आगे क्या
फिलहाल इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच चल रही है और पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमों की जांच भी जारी है। विपक्ष का कहना है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा और व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।






