
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की पावन घाटियों में अवस्थित थानो क्षेत्र के लेखक गाँव में सोमवार को “स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025” का शुभारंभ एक अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा के साथ हुआ। स्पर्श हिमालय फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन आचार्य श्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य और मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह आयोजन उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया है। “लेखक गाँव” की स्थापना पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की प्रेरणा से हुई थी, जो अब साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन चुका है।
उद्घाटन सत्र और मुख्य वक्तव्य
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पूज्य आचार्यश्री अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा,
“थानो स्थित लेखक गाँव आज अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, कला, साधना और संस्कृति का अद्वितीय केंद्र बन चुका है। यह स्थान केवल भौतिक नहीं, बल्कि चेतना और सृजन का संगम है, जहाँ शब्द साधना में परिवर्तित होकर नई दिशा प्रदान करते हैं।”
उन्होंने “स्पर्श हिमालय महोत्सव” को सनातन संस्कृति, वेद, उपनिषद और आयुर्वेद के समन्वय का प्रतीक बताया।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट उपस्थिति
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू, मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, इंडोनेशिया बाली के एम.एल.ए. प्रो. सोमवीर, पतंजलि योगपीठ के सह-संस्थापक आचार्य बालकृष्ण, एन.ए.ए.सी एवं एन.बी.ए. के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे, पद्मश्री डॉ. बी.के.एस. संजय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्रीमती श्रेयशी निशंक, श्रीमती आरुषि निशंक और श्रीमती विदुषी निशंक ने भी भाग लिया। देश-विदेश से अनेक लेखक, विचारक और सांस्कृतिक प्रेमी इस आयोजन का हिस्सा बने।
कार्यक्रम का महत्व और भावना
“लेखक गाँव” का यह आयोजन साहित्य और अध्यात्म के समन्वय का अनूठा उदाहरण है। यहाँ विचार और सृजन एक साथ प्रवाहित होते हैं, जिससे मानवता सनातन संस्कृति की नई प्रेरणा से आलोकित होती है। कार्यक्रम में पारंपरिक संगीत, योग, साहित्यिक विमर्श और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध परंपरा का प्रदर्शन किया गया।
आगे क्या होगा
“स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025” में आने वाले दिनों में अनेक सत्र आयोजित होंगे, जिनमें पर्यावरण, संस्कृति, अध्यात्म, महिला सशक्तिकरण और युवा सृजन जैसे विषयों पर चर्चा होगी।







