
देहरादून: नामी रियल एस्टेट बिल्डर सतेंद्र साहनी उर्फ बाबा साहनी की आत्महत्या मामले में राजपुर थाना पुलिस ने 18 महीने बाद एफआर (फाइनल रिपोर्ट) दाखिल करते हुए केस बंद कर दिया है। पुलिस के अनुसार गुप्ता बंधु अजय गुप्ता और उनके बहनोई अनिल गुप्ता के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून के रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय बिल्डर सतेंद्र साहनी की आत्महत्या ने 2024 में व्यापक चर्चा बटोरी थी। सहस्त्रधारा रोड स्थित पेसिफिक गोल्फ स्टेट की 8वीं मंजिल से कूदकर उनकी मौत के बाद मामला चर्चा में आया। सुसाइड नोट, साझेदारियों, वित्तीय विवादों और व्यापारिक दबावों ने इस केस को और जटिल बना दिया था।
अधिकारिक जानकारी
पुलिस के अनुसार सतेंद्र साहनी की जेब से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें अजय गुप्ता और अनिल गुप्ता का नाम लिखा था। उनके बेटे रणवीर सिंह साहनी के बयान के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
हालांकि, जांच के दौरान पुलिस को आत्महत्या के लिए उकसाने के स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले। कुछ दिनों बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत दे दी थी। अब पुलिस ने जांच पूरी कर एफआर दाखिल कर केस बंद कर दिया है।
एसएसपी अजय सिंह का कहना है कि, “मामले से जुड़े सभी तथ्यों के आधार पर एफआर दाखिल की गई है और किसी भी शिकायतकर्ता ने आपत्ति नहीं जताई है।”
कुछ अधिकारी इस मामले पर अधिक टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि मामला शुरू से ही जटिल था और व्यापारिक साझेदारियों से जुड़े विवादों के कारण कई सवाल उठे थे। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि घटना ने शहर के बिल्डरों और निवेशकों में चिंता बढ़ा दी थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह समय पूरी रियल एस्टेट कम्युनिटी के लिए तनावपूर्ण था, लेकिन केस बंद होने के बाद अब स्थिति शांत होती दिख रही है।
व्यापारिक पृष्ठभूमि
सतेंद्र साहनी साहनी इंफ्रास्ट्रक्चर और साहनी इंफ्रा के निदेशक थे। सहस्त्रधारा हेलीपैड और राजपुर रोड के पास वह दो प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे।
शुरुआत में बिल्डर संजय गर्ग उनके पार्टनर थे, लेकिन बड़े फाइनेंसर की तलाश में उन्होंने गुप्ता बंधु से साझेदारी की। गुप्ता बंधु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दक्षिण अफ्रीका में आईटी, मीडिया और खनन के व्यवसाय के लिए जाने जाते हैं और स्टेट कैप्चर घोटाले में विवादों में रह चुके हैं।
डेटा / संख्या
- घटना: 24 मई 2024
- जांच अवधि: लगभग 18 महीने
- शामिल पक्ष: सत्येंद्र साहनी, अजय गुप्ता, अनिल गुप्ता
- कंपनियाँ: साहनी इंफ्रास्ट्रक्चर, साहनी इंफ्रा
अब आगे क्या?
एफआर दाखिल होने के साथ ही यह मामला पुलिस स्तर पर बंद हो गया है। यदि किसी पक्ष को जांच पर आपत्ति हो तो वे कानूनी उपाय अपना सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी भी तरह की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं हुई है।





