
रुद्रप्रयाग: रुद्रप्रयाग जिला भौगोलिक रूप से वन क्षेत्रों से घिरा होने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। शीतऋतु में रात की अवधि बढ़ने से वन्यजीवों की गतिविधियां पहले शुरू हो रही हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में खतरा बढ़ गया है। बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव का निर्णय लिया है। यह आदेश दिसंबर 2025 के अंत तक प्रभावी रहेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रुद्रप्रयाग जिले के कई विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे मार्गों पर स्थित हैं, जो घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। सर्दी के मौसम में भालू सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ने से पहले भी कई बार मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों की आवाजाही को लेकर खतरा और गहरा गया है।
आधिकारिक जानकारी
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि जिले के शासकीय, अर्धशासकीय और गैर-शासकीय विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में दिसंबर 2025 के अंत तक सुबह 9:15 बजे से पहले और दोपहर 3 बजे के बाद पठन-पाठन कार्य संचालित नहीं किया जाएगा।
डीएम ने मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी/बाल विकास अधिकारी को आदेश के कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश की अवहेलना पर आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि सर्दियों में अंधेरा जल्दी होने के कारण बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो गया है।
अभिभावकों ने बताया कि कई गांवों में बच्चों को वन क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे हर दिन डर बना रहता है।
भालू देखकर लौटे छात्र
मंगलवार सुबह चिनग्वाड़ ग्रामसभा के लाटधार तोक में स्कूल जा रहे छात्र रास्ते में भालू देखकर वापस लौट आए। घटना सुबह करीब 8 बजे की है, जब छात्र प्रियांशु और सचिन अपने परिजनों के साथ राजकीय इंटर कॉलेज पीड़ा की ओर जा रहे थे। पेड़ पर भालू दिखाई देने और उसके आगे बढ़ने पर सभी जान बचाकर घर लौट आए। इसके बाद से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
जनप्रतिनिधियों की मांग
चिनग्वाड़ ग्राम प्रधान दीपक बिष्ट ने बताया कि क्षेत्र में भालू की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने वन विभाग से विशेष निगरानी और गश्त बढ़ाने की मांग की है।
जिला पंचायत सदस्य पवन कुमार ने भी प्रशासन से बच्चों के सुरक्षित आवागमन के लिए वाहन व्यवस्था उपलब्ध कराने और संवेदनशील क्षेत्रों में ठोस कदम उठाने की अपील की है।
आंकड़े / तथ्य
विद्यालय और आंगनबाड़ी संचालन समय पर प्रतिबंध: दिसंबर 2025 के अंत तक
सुबह संचालन नहीं: 9:15 बजे से पहले
दोपहर संचालन नहीं: 3 बजे के बाद
आगे क्या?
प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। वन विभाग से समन्वय कर गश्त बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाने की तैयारी है। हालात सामान्य होने पर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।





