
रुद्रप्रयाग: जिले में जंगली जानवरों के लगातार बढ़ते हमलों को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। डीएम प्रतीक जैन ने वन विभाग को आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए 50 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत की है, ताकि मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रुद्रप्रयाग सहित पूरे गढ़वाल क्षेत्र में हाल के सप्ताहों में गुलदार, भालू और अन्य वन्यजीवों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है। कई लोग हमलों में घायल हुए और कुछ ने अपनी जान भी गंवाई है। इन घटनाओं से ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है और लोग लगातार सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन का त्वरित निर्णय
लगातार बढ़ रही घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने 50 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि जारी की है। यह धन वन विभाग को आधुनिक निगरानी और सुरक्षा उपकरण खरीदने के लिए दिया गया है।
इसमें आधुनिक थर्मल ड्रोन, फॉक्स लाइट, ट्रेंकुलाइज गन, उच्च क्षमता वाले पिंजरे और अन्य सुरक्षा सामग्री शामिल होगी।
इन उपकरणों का उपयोग संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, जंगली जानवरों की मूवमेंट को रियल-टाइम ट्रैक करने, रेस्क्यू कार्यों को तेज करने और आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए किया जाएगा।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने बताया कि हाल ही में मानव–वन्यजीव संघर्ष में उल्लेखनीय वृद्धि को देखते हुए नए उपकरणों की जरूरत महसूस की गई थी। इस संबंध में प्रस्ताव डीएम को भेजा गया था, जिस पर 28 नवंबर 2025 को आयोजित बैठक में तत्काल स्वीकृति दे दी गई।
उन्होंने कहा कि नए उपकरणों से न केवल हमलों को रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि गश्त बढ़ाने, अलर्ट सिस्टम को मजबूत करने और रेस्क्यू ऑपरेशनों की कार्यक्षमता में भी भारी सुधार होगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने प्रशासन के इस कदम को राहतकारी बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण वन विभाग कई बार समय पर कार्रवाई नहीं कर पाता था।
अब उम्मीद है कि जंगली जानवरों की गतिविधियों पर नियंत्रण और सतर्कता बढ़ेगी।
आगे क्या?
डीएम प्रतीक जैन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार रिपोर्ट भेजी जाए और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त गश्त बढ़ाई जाए।
साथ ही ग्रामीणों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने, सुरक्षा निर्देशों की जानकारी देने और किसी भी घटना की सूचना तुरंत विभाग को देने की अपील की गई है।
जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त योजना का मुख्य उद्देश्य मानव–वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित कर स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।






