
ऋषिकेश: तीर्थनगरी ऋषिकेश में गंगाघाटों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर टाइल्स उखड़ चुकी हैं, जिससे श्रद्धालुओं को गंगा स्नान और आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर रामानंद घाट की हालत जर्जर बनी हुई है और लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रही है। सिंचाई विभाग ने मरम्मत कार्य उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) को सौंपे जाने की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कोई कार्यवाही शुरू नहीं हुई है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
ऋषिकेश के घाटों पर देश-विदेश से श्रद्धालु गंगा दर्शन, पूजन और स्नान के लिए पहुंचते हैं। रामानंद घाट से होते हुए श्रद्धालु मुनिकीरेती आस्थापथ तक भी जाते हैं। ऐसे में घाटों की खराब स्थिति न केवल सौंदर्य पर असर डाल रही है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय बन गई है।
त्रिवेणीघाट पर बरसात में जमा मलबा हटाने में देरी पहले ही चर्चा का विषय रहा है। अब रामानंद घाट की उखड़ी टाइल्स और जर्जर सतह भी परेशानी का कारण बन रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी राम किशन यादव, जतिन सक्सेना और महेंद्र रतूड़ी ने बताया कि घाट की मरम्मत के लिए कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। उनका कहना है कि बुजुर्ग श्रद्धालु जर्जर हिस्सों पर चलते समय लड़खड़ा जाते हैं, जिससे चोटिल होने का खतरा बना रहता है।
पर्व-त्योहारों के दौरान जब श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है, तब त्रिवेणीघाट से रामानंद घाट की ओर जाने वाले लोगों को अधिक असुविधा झेलनी पड़ती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सिंचाई विभाग के एसडीओ सुरेंद्र श्रीकोटी ने बताया कि घाटों की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का कार्य अब यूयूएसडीए के जिम्मे है। उन्होंने कहा कि रामानंद घाट के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी संबंधित एजेंसी को दे दी गई है।
हालांकि, फिलहाल मरम्मत कार्य शुरू होने की कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
अब निगाहें यूयूएसडीए की ओर से प्रस्तावित मरम्मत और सौंदर्यीकरण कार्यों पर टिकी हैं। श्रद्धालु और स्थानीय लोग जल्द कार्य शुरू होने की अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि आगामी पर्व-त्योहारों से पहले घाट सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकें।
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