
ऋषिकेश: हरिद्वार रोड पर मनसा देवी फाटक के पास मंगलवार रात हुई भीषण सड़क दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। निराश्रित गोवंश के अचानक सड़क पार करने, तेज रफ्तार कार और धूल के गुबार के बीच चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। बुधवार को दिनभर विभागीय अधिकारी मौके का निरीक्षण करते रहे, जबकि एम्स ऋषिकेश की मोर्चरी के बाहर मृतकों के परिजन अपने प्रियजनों को खोने का यकीन नहीं कर पा रहे थे। यह दुर्घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, निराश्रित पशुओं और तेज रफ्तार वाहनों को लेकर कई गंभीर सवाल छोड़ गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नगर निगम ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से निराश्रित पशुओं के सड़कों पर घूमने की समस्या बनी हुई है। हादसे के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में एक गोवंश को रात के समय एक लेन से दूसरी लेन में जाते हुए देखा गया। इसी दौरान तेज रफ्तार कार चालक का नियंत्रण बिगड़ता नजर आया। यह सवाल भी उठ रहा है कि निराश्रित पशु सड़कों पर कैसे और किसके जिम्मे छोड़े जा रहे हैं, वहीं वाहन चालकों की रफ्तार पर भी चिंता जताई जा रही है।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गोवंश अचानक वाहन के सामने आ गया था। कार की गति को लेकर भी जांच की जा रही है। कोतवाली ऋषिकेश के प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट ने बताया कि हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है। हादसे में मृत 31 वर्षीय धीरज जायसवाल निवासी चंद्रेश्वरनगर, 22 वर्षीय हरिओम पांडे निवासी रूषाफार्म गुमानीवाला, 23 वर्षीय करण प्रसाद निवासी विस्थापित निर्मल ब्लाक-सी और 20 वर्षीय सत्य कुमार निवासी गुमानीवाला का एम्स ऋषिकेश में पोस्टमार्टम किया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
एम्स मोर्चरी के बाहर मृतकों के परिजन फूट-फूटकर रोते नजर आए। हरिओम के पिता अरविंद, भाई और बहनें सदमे में थे। वहीं धीरज, करण और सत्य के स्वजन भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते निराश्रित पशुओं और तेज रफ्तार पर नियंत्रण किया जाता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
परिवारों पर टूटा दुख
मृतक करण प्रसाद की शादी इसी वर्ष हुई थी और परिवार परिवहन व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। हरिओम का तीन दिसंबर को जन्मदिन था। चंद्रेश्वरनगर निवासी धीरज जायसवाल के दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र पांच साल से भी कम है। सत्य कुमार चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। चारों युवक आपस में पुराने मित्र थे और घूमकर वापस लौट रहे थे।
संयुक्त टीम का निरीक्षण
हादसे के बाद पुलिस, परिवहन और प्रशासन की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। टीम ने दुर्घटना संभावित क्षेत्र में वाहनों की गति सीमित रखने, नो पार्किंग और नो स्टॉपेज प्वाइंट तय करने, निगरानी के लिए एएनपीआर कैमरे लगाने और डिवाइडर के बीच अनावश्यक कट बंद करने के सुझाव दिए। निराश्रित पशुओं को भी सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण माना गया। निरीक्षण टीम में एसपी देहात जया बलोनी, सीओ पूर्णिमा गर्ग, एआरटीओ प्रशासन आरएस कटारिया, प्रवर्तन अधिकारी रश्मि पंत और शहर कोतवाल कैलाश चंद्र भट्ट शामिल रहे।
विधायक ने दी सांत्वना
हादसे में मृतकों के स्वजनों से मिलने विधायक प्रेमचंद अग्रवाल एम्स पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बातचीत कर कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने संबंधित विभागों से घटना को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
आगे क्या होगा
पुलिस द्वारा जांच पूरी करने के बाद हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट की जाएगी। वहीं प्रशासन की ओर से सड़क सुरक्षा उपायों और निराश्रित पशुओं की समस्या को लेकर ठोस कार्रवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है।






