
ऋषिकेश: उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाली ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो चुकी है और मार्च माह से रेल पटरियां बिछाई जाएंगी। परियोजना में अनुमानित 750 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे पूरा होने में करीब ढाई साल का समय लगेगा। सुरंगों की खोदाई लगभग पूरी हो जाने के बाद अब भूमि समतलीकरण और ट्रैक बिछाने का कार्य तेज किया गया है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन और विकास को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं में शामिल है। पहाड़ी भूगोल के कारण वर्षों से रेल नेटवर्क से वंचित रहे क्षेत्रों को जोड़ने के उद्देश्य से इस परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसके पूरा होने से चारधाम यात्रा, स्थानीय आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।
आधिकारिक जानकारी
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, रेल ट्रैक बिछाने के लिए भूमि समतलीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। मार्च के पहले सप्ताह से ट्रैक बिछाने का काम आरंभ होगा। ट्रैक बिछाने की गति प्रति माह करीब छह किलोमीटर रखने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले चरण में ऋषिकेश–शिवपुरी के बीच 17 किलोमीटर हिस्से पर ट्रैक बिछाया जाएगा।
सुरंगों की स्थिति
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन में सुरंगों की भूमिका सबसे अहम है। कुल मुख्य और एस्केप मिलाकर 213 किलोमीटर लंबी सुरंगों में से 209 किलोमीटर की खोदाई पूरी हो चुकी है। वहीं 125 किलोमीटर रेलवे ट्रैक के अंतर्गत 105 किलोमीटर मुख्य सुरंग में से 103 किलोमीटर की खुदाई समाप्त कर ली गई है। खोदी गई सुरंगों का फाइनल लाइनिंग कार्य भी पूरा हो चुका है, जिससे अब ट्रैक बिछाने का रास्ता साफ हो गया है।
लागत और निर्माण लक्ष्य
रेल लाइन बिछाने पर प्रति किलोमीटर लगभग छह करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर इस चरण में 750 करोड़ रुपये की लागत आएगी। परियोजना एजेंसी का कहना है कि तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने के लिए संसाधनों और मशीनरी की तैनाती बढ़ा दी गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेल लाइन शुरू होने से पहाड़ों में आवागमन आसान होगा और पर्यटन के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। व्यापारियों और युवाओं को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, मार्च से ट्रैक बिछने के बाद काम लगातार आगे बढ़ेगा और अगले ढाई वर्षों में पूरी रेल लाइन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद परीक्षण और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ट्रेन संचालन शुरू किया जाएगा।







