
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना में तेजी आती दिख रही है। परियोजना के धारीदेवी, सुमेरपुर, घोलतीर और गौचर स्टेशनों के निर्माण के लिए शुक्रवार को तकनीकी बिड खोली गई। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि दिसंबर के अंत तक निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद निर्माण चरण की शुरुआत होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य गढ़वाल हिमालयी क्षेत्रों को रेल सेवाओं से जोड़ना है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में कुल 13 रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इनमें से वीरभद्र और योगनगरी स्टेशनों का निर्माण वर्ष 2020 में पूरा हो चुका है, जबकि शिवपुरी और व्यासी स्टेशनों का निर्माण कार्य जारी है।
अधिकारिक जानकारी
शुक्रवार को परियोजना में चार स्टेशनों—धारीदेवी, सुमेरपुर, घोलतीर और गौचर—के निर्माण के लिए तकनीकी बिड खोली गई। अधिकारियों के अनुसार पांच अलग–अलग कंपनियों ने इसमें भाग लिया है। दिसंबर के अंत तक वित्तीय बिड खोल दी जाएगी।
आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि बिडिंग प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
परियोजना के पैकेज और लागत
रेलवे स्टेशन निर्माण चार पैकेजों में विभाजित है—
- पैकेज 1: व्यासी और शिवपुरी स्टेशन — लागत लगभग 60 करोड़ रुपये
- पैकेज 2: सौड़ जनासू, मलेथा और श्रीनगर स्टेशन — लागत लगभग 126 करोड़ रुपये
- पैकेज 3: धारीदेवी, सुमेरपुर, घोलतीर और गौचर स्टेशन — लागत लगभग 166 करोड़ रुपये
- पैकेज 4: कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशन — लागत लगभग 213 करोड़ रुपये
कुल लागत: लगभग 550 करोड़ रुपये
स्थानीय प्रतिक्रिया
परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में लोगों का कहना है कि स्टेशनों के बन जाने के बाद आवाजाही आसान होगी, पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।
आगे क्या
दिसंबर के अंत में बिड फाइनल होने के बाद जनवरी से निर्माण कार्य गति पकड़ सकता है। आने वाले वर्षों में पूरी रेललाइन पूर्ण होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल यात्रा न सिर्फ सुविधाजनक बल्कि सुरक्षित भी होगी।






