
ऋषिकेश: रेल विकास निगम लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। दो दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने ऋषिकेश से देवप्रयाग तक विभिन्न निर्माण स्थलों का जायजा लेते हुए पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरंगों और अन्य निर्माण कार्यों से हुई हरित क्षति की भरपाई के लिए ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
सोमवार को परियोजना की प्रगति को लेकर इंजीनियरों और विशेषज्ञों के साथ समीक्षा बैठक हुई थी। इसके बाद मंगलवार को सीएमडी ने मार्ग पर जाकर निर्माण कार्यों की स्थिति देखी और आगे की रणनीति पर चर्चा की।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सीएमडी सलीम अहमद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता किए बिना रेल परियोजना की कमिशनिंग वर्ष 2028 में हर हाल में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने समयबद्ध कार्य, सुरक्षा मानकों के पालन और आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग पर बल दिया। निरीक्षण के दौरान मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी और उपमहाप्रबंधक ओपी मालगुड़ी भी मौजूद रहे।
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स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय स्तर पर परियोजना से जुड़े लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ निर्माण पर दिया गया जोर चारधाम मार्ग और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी होगा। ग्रीन बेल्ट और पौधरोपण से क्षेत्र की पारिस्थितिकी को सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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आंकड़े और तथ्य
सीएमडी के अनुसार, परियोजना हिमालयी क्षेत्र की जटिल चुनौतियों—गहरी घाटियां, कमजोर चट्टानें, जल रिसाव, मौसम की मार और भूकंपीय संवेदनशीलता—के बीच संचालित हो रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए टनल बोरिंग मशीन, स्वचालित ड्रिल जंबो, रोबोटिक पीएलसी, नियंत्रित शॉटक्रिट सिस्टम, उन्नत डी-वाटरिंग, पाइप रूफिंग, रसायनिक व सीमेंट ग्राउडिंग तथा भूकंपरोधी सुरंग व पुल डिजाइन अपनाए जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
आरवीएनएल के अनुसार, आने वाले चरणों में हरित क्षेत्र विकास और व्यापक पौधरोपण को तेज किया जाएगा। साथ ही, निर्माण कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग कर समय-सीमा के भीतर सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कमिशनिंग पर फोकस रहेगा।
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