
ऋषिकेश: परमार्थ निकेतन में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में शनिवार को उत्तराखंड के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह अपनी धर्मपत्नी गुरमीत कौर के साथ शामिल हुए। इस अवसर पर करीब 11 देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और राजनयिकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने राज्यपाल का अंगवस्त्र और रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर स्वागत किया।
महोत्सव के दौरान सुबह से शाम तक योग जिज्ञासुओं ने विभिन्न योग सत्रों में भाग लेकर योगाभ्यास किया। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि मां गंगा के तट पर आयोजित यह आयोजन अपने आप में एक विशेष अनुभव है।
योग से जुड़ता है शरीर, मन और आत्मा
राज्यपाल ने कहा कि योग का वास्तविक अर्थ एकत्व है। हिमालय की गोद और मां गंगा के तट पर बैठकर साधना करना व्यक्ति को परमात्मा से जोड़ने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि इस योग महोत्सव में ईरान, इस्राइल और अमेरिका सहित कई देशों के लोग एक साथ बैठे हैं, जो पूरी दुनिया के लिए एकता, सद्भाव और शांति का संदेश है।
उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से व्यक्ति न केवल श्वास, आसन और क्रियाओं को सीखता है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की कला भी समझता है। यही इस योग महोत्सव का मूल उद्देश्य है।
विश्व को शांति का संदेश देने की अपील
राज्यपाल ने योग साधकों से कहा कि वे यहां से शांति और सद्भाव का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि गंगा का पवित्र जल और हिमालय की पावन हवाएं यहां की सकारात्मक ऊर्जा को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि देवभूमि उत्तराखंड ऋषियों की तपस्थली है और यहां से आयुर्वेद तथा समग्र स्वास्थ्य की परंपरा पूरे विश्व को मार्गदर्शन देती रही है। इस अवसर पर उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का संदेश भी दिया।
योग दुनिया को जोड़ने का माध्यम
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि योग साधक परमात्मा के प्रकाश के समान हैं और उन्हें इस प्रकाश को अपने साथ लेकर पूरी दुनिया में फैलाना चाहिए।
स्विट्जरलैंड के संस्कृति मंत्री साइमन सेवन शाफर ने कहा कि योग और कूटनीति विभिन्न देशों के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। योग केवल आसनों का अभ्यास नहीं, बल्कि यह व्यक्ति को नई ऊर्जा देता है और तनाव को दूर कर विश्व को सद्भाव के सूत्र में बांधता है।
योगाचार्य स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट ने कहा कि यह महोत्सव दुनिया भर के योगियों के लिए एक अद्भुत अवसर है और यहां आना स्वयं मां गंगा के निमंत्रण के समान है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने योग जिज्ञासुओं और योगाचार्यों के साथ मिलकर सांध्यकालीन गंगा आरती में भी भाग लिया।







