
ऋषिकेश: ऋषिकेश में वन भूमि पर बसे 12 वार्डों को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब नगर निगम खुलकर लोगों के समर्थन में आता नजर आ रहा है। इसी क्रम में नगर निगम की आपातकालीन बोर्ड बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी 40 वार्डों के पार्षद शामिल हुए। बैठक में वन भूमि पर निवासरत लोगों की समस्याओं, विकास कार्यों पर लगी रोक और कानूनी विकल्पों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के बाद महापौर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया, जो दिल्ली जाकर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता से मामले में कानूनी सलाह लेगी। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई प्रस्तावित है और इसका सीधा असर हजारों परिवारों पर पड़ सकता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश के कई रिहायशी क्षेत्र वन भूमि पर बसे हुए हैं, जहां लंबे समय से लोग निवास कर रहे हैं। हाल ही में वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हुई, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। विरोध के दौरान सड़कों, हाईवे और रेलवे ट्रैक तक जाम हुए, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।
आधिकारिक जानकारी
नगर निगम के नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने बोर्ड बैठक के बाद मीडिया को बताया कि बैठक में वन भूमि पर काबिज लोगों की समस्याओं पर गहन चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि नगर निगम इन क्षेत्रों में नियमानुसार हाउस टैक्स लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार कर रहा है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्माण कार्यों पर लगाई गई रोक के कारण बाधित हो रहे विकास कार्यों को दोबारा शुरू कराने को लेकर भी मंथन हुआ है।
नगर आयुक्त के अनुसार, नगर निगम इस भूमि को डिफॉरेस्ट करने की मांग का प्रस्ताव शासन को भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी, जो सरकार के समक्ष नगर निगम का पक्ष रखेगी। इसके अलावा नगर निगम स्वयं पार्टी बनकर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता से कानूनी राय लेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे दशकों से इन इलाकों में रह रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने घर और रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है। लोगों को उम्मीद है कि नगर निगम के इस कदम से उन्हें कानूनी राहत मिल सकती है।
आंकड़े / तथ्य
ऋषिकेश के 12 वार्ड इस विवाद से सीधे प्रभावित हैं। नगर निगम के सभी 40 वार्डों के पार्षद बैठक में शामिल हुए। हजारों की संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर उतरे थे।
आगे क्या होगा
नगर आयुक्त ने बताया कि 4 जनवरी को महापौर शंभू पासवान की अध्यक्षता में पार्षदों की एक टीम दिल्ली जाकर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता से मुलाकात करेगी। अधिवक्ता की फीस नगर निगम बोर्ड फंड से वहन की जाएगी और जनता से कोई धनराशि नहीं ली जाएगी। वहीं, वन विभाग द्वारा तैयार की जा रही रिपोर्ट को 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाना है, जिस पर अगली सुनवाई होगी। अब सबकी नजर कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई है।





