
देहरादून: नगर एकीकृत विकास परियोजना के तहत ऋषिकेश में यातायात और शहरी मोबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए करीब 25 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। यह जानकारी देहरादून में आयोजित ई-बस और इंटीग्रेटेड यूनिट कंपनियों के बिडर्स कॉन्क्लेव में सामने आई। परियोजना का संचालन उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी द्वारा किया जाएगा, जबकि इसका वित्तपोषण केएफडब्ल्यू जर्मन बैंक करेगा। यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ऋषिकेश में बढ़ते तीर्थ, पर्यटन और यातायात दबाव के बीच स्वच्छ और सुगम सार्वजनिक परिवहन की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ऋषिकेश तीर्थनगरी होने के साथ-साथ योग, साहसिक पर्यटन और व्यापार का प्रमुख केंद्र है। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, कुंभ और सालभर चलने वाले पर्यटन के कारण यहां यातायात को सुचारू रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहता है। नगर निगम बनने के बाद शहर का भौगोलिक विस्तार भी तेजी से हुआ है, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ गई है।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड परिवहन निगम के तकनीकी उपमहाप्रबंधक भूपेश आनंद कुशवाह ने बताया कि निगम ई-बस परियोजना के लिए पहले ही अनुमति दे चुका है और बसों के संचालन व रखरखाव में पूरा सहयोग देगा।
वहीं, उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी के अपर कार्यक्रम निदेशक विनय मिश्रा ने कहा कि मोबिलिटी परियोजना के तहत प्रारंभिक चरण में 25 ई-बसों की तैनाती से ऋषिकेश में प्रदूषण रहित, सुरक्षित और सुगम सार्वजनिक यातायात सुनिश्चित किया जा सकेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि यदि ई-बस सेवा नियमित और समयबद्ध तरीके से चलाई जाती है, तो इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और तीर्थ यात्रियों व पर्यटकों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
आंकड़े / तथ्य
प्रस्तावित ई-बस सेवा से जुड़े प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:
- प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस 7 मीटर लंबी और 22 सीटर क्षमता वाली होगी।
- योजना को ऋषिकेश की संकरी सड़कों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
- पहले चरण में 10–12 किलोमीटर क्षेत्र में प्रारंभिक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
- इस कॉरिडोर में नेपाली फार्म, आईएसबीटी, रेलवे स्टेशन और त्रिवेणी घाट शामिल होंगे।
- कुल 25 ई-बसों के साथ डिपो विकास और आईटी इंटीग्रेशन भी किया जाएगा।
आगे क्या होगा
नगर एकीकृत विकास परियोजना के अंतर्गत ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र के साथ-साथ पौड़ी जिले के स्वर्गाश्रम और टिहरी जिले के तपोवन व मुनि की रेती क्षेत्रों में पेयजल, सीवरेज, सड़कों, वर्षाजल-बाढ़ प्रबंधन और नगरीय यातायात सुधार की योजनाओं पर भी काम किया जाएगा। एजेंसी द्वारा नियुक्त परामर्शदाताओं ने परियोजना के सभी पहलुओं की विस्तृत प्रस्तुति दी है। आने वाले महीनों में ई-बस सेवा के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।





