
ऋषिकेश: होली के नजदीक आते ही ऋषिकेश और देहरादून क्षेत्र से पूर्वांचल की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। चार मार्च को होली होने के कारण नौकरीपेशा लोग और छात्र अपने घर लौटने की तैयारी में हैं, लेकिन लंबी दूरी की अधिकतर ट्रेनों में एसी और स्लीपर कोच पहले ही फुल हो चुके हैं। पूर्वांचल रूट पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। अभी तक होली स्पेशल ट्रेनों की घोषणा न होने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
हर वर्ष होली और अन्य प्रमुख त्योहारों पर उत्तराखंड से पूर्वांचल, बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है। ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग त्योहार पर अपने गृह जनपद लौटते हैं।
इस बार भी देहरादून से वाराणसी, गोरखपुर, हावड़ा और इलाहाबाद की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में बुकिंग लगभग पूरी हो चुकी है। रेलवे प्रबंधन ने मार्च के पहले सप्ताह में कई ट्रेनों में नई बुकिंग पर रोक लगा दी है, क्योंकि वेटिंग सूची लंबी हो चुकी है।
आंकड़े और तथ्य
देहरादून-वाराणसी के बीच चलने वाली जनता एक्सप्रेस में तीन मार्च तक वेटिंग चल रही है। देहरादून-गोरखपुर रूट की राप्तीगंगा एक्सप्रेस और अन्य ट्रेनों में एसी श्रेणी में लंबी वेटिंग है, जबकि स्लीपर कोच की बुकिंग पहले ही बंद हो चुकी है।
देहरादून से हावड़ा जाने वाली कुंभ एक्सप्रेस और उपासना एक्सप्रेस भी फुल हैं। इलाहाबाद-सूबेदारगंज रूट की ट्रेन में एसी और स्लीपर दोनों श्रेणियों में प्रतीक्षा सूची चल रही है।
वहीं देहरादून-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस में एसी क्लास में एक मार्च तक वेटिंग दर्ज है। देहरादून-दिल्ली वंदेभारत में स्लीपर में कुछ राहत है, लेकिन एसी श्रेणी में वेटिंग बनी हुई है।
दिल्ली रूट की जन शताब्दी और मसूरी एक्सप्रेस में फिलहाल कुछ सीटें उपलब्ध बताई जा रही हैं, जिससे स्थानीय यात्रियों को आंशिक राहत मिली है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ना सामान्य है और वेटिंग सूची के अनुसार सीट आवंटन की प्रक्रिया जारी है। होली स्पेशल ट्रेनों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ऋषिकेश क्षेत्र के कई यात्रियों ने बताया कि वे रोजाना आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल एप पर वेटिंग स्टेटस जांच रहे हैं। कुछ लोग 139 हेल्पलाइन पर कॉल कर जानकारी जुटा रहे हैं।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ट्रेन में सीट न मिलने पर उन्हें बस और टैक्सी से जाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा खर्च बढ़ रहा है और असुविधा भी हो रही है।
आगे क्या होगा
यदि वेटिंग सूची इसी तरह लंबी बनी रही तो रेलवे पर अतिरिक्त कोच या विशेष ट्रेन चलाने का दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल यात्रियों को टिकट की स्थिति पर नजर बनाए रखने और वैकल्पिक साधनों की योजना बनाने की सलाह दी जा रही है।
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