
रामनगर: पूछड़ी क्षेत्र में रविवार तड़के शुरू हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करीब सात घंटे तक चली। वन विभाग, पुलिस और राजस्व टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर 25 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। कई परिवार रोते-बिलखते घर खाली करते दिखे, वहीं स्टांप पर जमीन खरीद–फरोख्त का पुराना मामला भी फिर चर्चा में आ गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
तराई पश्चिमी वन प्रभाग की रामनगर रेंज में बीते एक दशक में 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर अवैध कॉलोनियां बसाई गई थीं। पिछले वर्ष हुई जांच में पता चला कि 170 से अधिक परिवारों को 10 रुपये के स्टांप पर जमीनें बेची गईं, जिसकी बिक्री में ताहिर, अजमत, फईम अहमद, उस्मान खान, कमला देवी और धीरेंद्र के नाम सामने आए। इस मामले में सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज भी किया गया था।
पूछड़ी में रविवार को इन्हीं अतिक्रमणों के पहले चरण को हटाया गया।
अधिकारिक जानकारी
सुबह पांच बजे प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को अंतिम चेतावनी दी और एक घंटे का समय दिया। जैसे ही छह बजे का समय हुआ, नौ जेसीबी और चार पोकलैंड मशीनों ने संरचनाएँ ध्वस्त करना शुरू कर दिया।
एसएसपी नैनीताल मंजूनाथ टीसी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान स्टांप पर जमीन बेचने वाले ताहिर और सलीम के नाम फिर सामने आए हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अभियान में 15 पक्के और 37 कच्चे मिलाकर कुल 52 अतिक्रमण ध्वस्त किए गए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्रवाई से पहले शनिवार रात लोग बिजली कटने और मुनादी सुनते ही घर खाली करने लगे। कई परिवार अंधेरे में रोते–बिलखते अपना सामान निकालते रहे। सुबह होते ही बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आंसुओं के साथ अपने टूटे घरों से दूर जाते दिखे।
कुछ ग्रामीणों ने कहा कि वे वर्षों से यहां रह रहे थे और जमीन खरीदने के समय उन्हें यह नहीं बताया गया कि यह वन भूमि है।
कार्रवाई का स्वरूप—डेटा और विवरण
– कुल कार्रवाई समय: सुबह 6 बजे से दोपहर 1 बजे तक (7 घंटे)
– ध्वस्त अतिक्रमण: 52 (15 पक्के, 37 कच्चे)
– कब्जा मुक्त भूमि: 25 हेक्टेयर
– शामिल टीमें: वन विभाग, राजस्व, पुलिस
– मशीनरी: 9 JCB, 4 पोकलैंड, 10 डंपर, 4 ट्रैक्टर
– सुरक्षा व्यवस्था: 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे
पूछड़ी क्षेत्र की सीधी सड़क खराब होने से पोकलैंड मशीनें छह बजे तक नहीं पहुँच सकीं और उन्हें कालूसिद्ध होते हुए साइट तक लाया गया।
ट्रंचिंग ग्राउंड की भूमि अतिक्रमण मुक्त
नगर पालिका ने 2019 में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए 12 बीघा भूमि 30 वर्ष के लिए ली थी, जिसके बदले 98 लाख रुपये वन विभाग को दिए गए थे। कब्जा उपलब्ध न होने से 9 बीघा भूमि पर अतिक्रमण हो गया था। रविवार को यही भूमि भी पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर दी गई।
वन विभाग ने कब्जाई गई खेती को समतल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
विरोध और हिरासत
अभियान के दौरान गुलरघट्टी में कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया और आगे जाने की अनुमति मांगी। पुलिस ने बैरियर लगाकर भीड़ को रोक दिया। विरोध बढ़ने पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी सहित 13 लोगों को हिरासत में लिया गया। शाम को सभी को छोड़ दिया गया।
आगे क्या?
वन विभाग ने संकेत दिया है कि आगे के चरणों में शेष अतिक्रमणों पर भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा जमीन खरीद–फरोख्त से जुड़े घोटाले की जांच जारी है और अधिकारियों ने कहा है कि संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





