
रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर में कोसी नदी में हो रहे खनन कार्य को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। खनन कारोबार से जुड़े सैकड़ों वाहन स्वामी और ट्रांसपोर्टर तराई पश्चिमी वन प्रभाग कार्यालय पहुंचे और कोसी नदी में 10 टायरा वाहनों को अनुमति दिए जाने का कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग पर नियमों की अनदेखी, अवैध रास्ते से भारी वाहनों के संचालन और जंगल को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए। मामला इसलिए अहम है क्योंकि इससे पर्यावरण, वन्यजीवों की सुरक्षा और सरकारी राजस्व तीनों पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी का खनन लंबे समय से विवादों में रहा है। कभी पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर तो कभी परिवहन मार्ग और वाहनों की क्षमता को लेकर स्थानीय लोग और खनन से जुड़े कारोबारी आमने-सामने आते रहे हैं। ताजा विवाद 10 टायरा भारी वाहनों को अनुमति दिए जाने को लेकर सामने आया है।
प्रदर्शन और ज्ञापन
खनन कारोबार से जुड़े वाहन स्वामी, ट्रांसपोर्टर और ग्रामीण बड़ी संख्या में तराई पश्चिमी वन प्रभाग कार्यालय पहुंचे। उन्होंने वन प्रभाग के अधिकारियों के समक्ष प्रदर्शन कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और प्रकाश चंद्र आर्य को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने इस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
अवैध रास्ते और जंगल को नुकसान के आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जुड़वा क्षेत्र में कीमती पेड़ों का अवैध कटान कर जंगल के बीच से नया रास्ता बनाया गया है। इस कथित अवैध मार्ग से भारी वाहनों का संचालन किया जा रहा है, जिससे न केवल वन क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि जंगली जानवरों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे मानव–वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
राजस्व चोरी और अवैध वसूली का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि बंद किए गए रास्तों पर बिना रॉयल्टी वाले वाहनों से प्रति वाहन करीब 500 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। उनका कहना है कि यह वसूली कथित तौर पर उच्च अधिकारियों के नाम पर की जा रही है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
किसानों की परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि भारी वाहनों की आवाजाही से खेतों और फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे किसानों की परेशानियां बढ़ रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि जिस पुराने मार्ग से पहले वैध रूप से खनन सामग्री का परिवहन होता था, उसी मार्ग को फिर से बहाल किया जाए।
आधिकारिक जानकारी
पूरे मामले पर डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने कहा कि खनन को लेकर ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है, जिसमें यह तय हो कि कौन से वाहन चलेंगे और कौन से नहीं। उनका कहना है कि नियमों में 10 टायरा वाहनों पर किसी प्रकार की मनाही का प्रावधान नहीं है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं किया गया, तो पर्यावरण और ग्रामीण जीवन दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि वे नियमों के दायरे में रहकर ही खनन कार्य चाहते हैं, लेकिन अव्यवस्था और कथित अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण लेंगे। वहीं वन विभाग की ओर से नियमों के आधार पर स्थिति की समीक्षा की बात कही जा रही है।





