
रामनगर: नैनीताल जनपद के रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी से होने वाली खनिज निकासी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां खनन कार्य के लिए पंजीकृत सैकड़ों वाहन रोजाना नदी से उपखनिज निकालते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के दौरान नियमों की अनदेखी के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद तराई पश्चिम वन प्रभाग ने सख्त रुख अपनाया है और नियमों के अनुरूप न पाए जाने वाले वाहनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी सीधे तौर पर प्रभावित होता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रामनगर क्षेत्र की कोसी नदी को खनिज निकासी का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां विभिन्न प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनमें कटिया पुल क्षेत्र सबसे प्रमुख है। नियमों के तहत खनिज ढोने वाले हर वाहन का उत्तराखंड वन विकास निगम में पंजीकरण और समय-समय पर उसका नवीनीकरण अनिवार्य है। इसके बावजूद लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि नवीनीकरण प्रक्रिया में नियमों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा।
आधिकारिक जानकारी
तराई पश्चिम वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त टीम गठित कर सभी संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी। जो वाहन नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाएंगे, उनका रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार उच्च स्तर के निर्देशों पर जल्द ही व्यापक चेकिंग अभियान शुरू किया जाएगा। फिलहाल, कटिया पुल क्षेत्र में संचालित सभी खनिज वाहनों की जानकारी उत्तराखंड वन विकास निगम से मांगी गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि खनिज निकासी से क्षेत्र में रोजगार तो बढ़ा है, लेकिन नियमों की अनदेखी होने पर पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
वहीं कुछ ग्रामीणों ने बताया कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़कों और नदी तंत्र पर भी असर पड़ रहा है।
आंकड़े और स्थिति
रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी से उपखनिज निकासी के लिए कुल पांच गेट निर्धारित किए गए हैं, जिनमें कालूसिद्ध, खड़ंजा, कटियापुल, बंजारी फर्स्ट और बंजारी सेकेंड गेट शामिल हैं।
दाबका नदी में उपखनिज निकासी के लिए एक गेट तय किया गया है। इन सभी गेटों से प्रतिदिन करीब तीन हजार वाहन उपखनिज लेकर गुजरते हैं। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही से राजस्व में बढ़ोतरी के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
आगे क्या होगा
वन विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा जल्द ही गेटों पर सघन जांच अभियान चलाए जाने की संभावना है। इसके बाद नियमों के उल्लंघन में पाए जाने वाले वाहनों पर रजिस्ट्रेशन निरस्तीकरण सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का दावा है कि खनन कार्य में पारदर्शिता और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।






