
ऋषिकेश के ऐतिहासिक रामझूला पुल की लंबे समय से लंबित मरम्मत प्रक्रिया अब दिसंबर से शुरू होने की संभावना है। विभाग ने निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है और संबंधित एजेंसी के साथ अनुबंध अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि पुल के सस्पेंडर वायर, डैक और टावर सहित पूरी संरचना की बड़े स्तर पर मरम्मत की जाएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
रामझूला पुल का निर्माण वर्ष 1985 में पैदल यात्रियों के लिए किया गया था। लगभग 220 मीटर लंबे इस पुल से बाद में दोपहिया वाहनों की आवाजाही भी होने लगी। लक्ष्मण झूला पुल को 2019 में बंद किए जाने के बाद रामझूला पर दबाव दोगुना बढ़ गया, जिससे पुल की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ लगातार सामने आती रहीं।
लोक निर्माण विभाग ने उसी वर्ष दोनों पुलों का सर्वे कराया था, जिसमें लक्ष्मण झूला को बंद करने और रामझूला पुल के पूर्ण सुधार की सलाह दी गई थी। कई बार भीड़ के दवाब में पुल के सस्पेंडर वायर टूटने की घटनाएँ भी सामने आईं, जिसके बाद इसे असुरक्षित पुलों की सूची में शामिल किया गया था।
आधिकारिक जानकारी
लोनिवि नरेंद्र नगर द्वारा भेजा गया मरम्मत प्रस्ताव कई वर्षों तक शासन स्तर पर लंबित रहा। अब विभाग ने निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है और एजेंसी का अनुबंध तैयार किया जा रहा है। मरम्मत का कार्य लगभग 9.5 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इसमें पुल के सस्पेंडर वायरों का पूरा बदलाव, डैक की मरम्मत और टावरों का सुधार शामिल है।
अधिशासी अभियंता प्रवीण कर्णवाल ने बताया कि दिसंबर से काम शुरू कराया जाएगा और इसे एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यापारियों और साधु–संत संगठनों ने पुल की मरम्मत प्रक्रिया तेज करने की मांग कई बार उठाई थी। उनका कहना है कि यह पुल न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि गंगा तटों पर आने वाले हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही का मुख्य मार्ग भी है।
आगे क्या
मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद पुल पर आवाजाही को नियंत्रित करने और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था पर भी प्रशासन निर्णय ले सकता है। विभाग का कहना है कि काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि शहर की दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित न हों।







