
हरिद्वार। एक समय बीएचईएल क्षेत्र में दहशत का दूसरा नाम बना ‘राजा’ नामक हाथी अब पूरी तरह बदल चुका है। आज वही राजा राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज का मुख्य आकर्षण बन गया है। इस साल नवंबर में जैसे ही चीला रेंज का गेट खुलेगा, सैलानी इस राजा हाथी और उसके साथियों पर बैठकर जंगल सफारी का अनोखा अनुभव ले सकेंगे।
वर्ष 2019 में राजा ने हरिद्वार के भेल क्षेत्र में तीन लोगों की जान ले ली थी। उस घटना के बाद यह हाथी “खूनी हाथी” के नाम से कुख्यात हो गया था और पूरे इलाके में दहशत का माहौल था। लोगों और वन विभाग दोनों के लिए राजा का नाम सुनना तक डरावना बन गया था। सुरक्षा की दृष्टि से इसे राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज में पुनर्वासित किया गया, जहां समय के साथ इसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया।
अब 27 वर्षीय यह दो दांतों वाला विशालकाय हाथी बेहद शांत, प्यारा और अनुशासित बन चुका है। चीला रेंज के हाथी बाड़ा इंचार्ज कंचन नौटियाल के अनुसार, “राजा अब सबकी कमांड तुरंत मानता है और सबसे व्यावहारिक हाथी बन गया है। कभी हमलावर रहा यह हाथी अब बेहतर जीवन जी रहा है।”
कई वर्षों बाद फिर शुरू होगी हाथी सफारी
कई वर्षों से बंद पड़ी चीला रेंज की हाथी सफारी इस वर्ष नवंबर में दोबारा शुरू की जा रही है। वर्तमान में हाथी बाड़े में सात हाथी मौजूद हैं — जिनमें तीन हाथी, तीन हथिनी और एक छोटा हाथी शामिल हैं। पर्यटक इनमें से किसी पर भी सवार होकर जंगल की गहराइयों में प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठा सकेंगे।
सफारी में शामिल प्रमुख हाथी:
- राधा – 37 वर्ष
- रंगीली – 38 वर्ष
- राजा – 27 वर्ष
- रानी – 12 वर्ष
- जॉनी – 9 वर्ष
- कमल – 3 वर्ष
रेंजर बिजेंद्र दत्त तिवारी के अनुसार, “हाथी सवारी के चार्ज अभी तय नहीं हुए हैं। अनुमति मिलते ही सवारी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी और दरें तय होते ही सूचना जारी की जाएगी।”
राजा की यह नई पहचान न केवल वन विभाग के लिए गर्व का विषय है, बल्कि इंसानों और जंगली जानवरों के बीच विश्वास और सह-अस्तित्व की मिसाल भी पेश करती है।







