
रायवाला (देहरादून): रायवाला के चकजोगीवाला क्षेत्र में इन दिनों गुलदार की लगातार मौजूदगी से स्थानीय लोग दहशत में हैं। चार दिन पहले लगाए गए पिंजरे में भी गुलदार नहीं फंसा है, जबकि वह रात के समय घरों तक पहुंचकर शिकार की तलाश कर रहा है। शनिवार रात एक घर में उसने कुत्ते पर हमला करने की भी कोशिश की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून वन प्रभाग की बड़कोट रेंज और राजाजी टाइगर रिजर्व की कांसरो रेंज से सटे क्षेत्रों में पिछले कुछ महीनों से मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है। चकजोगीवाला इलाके में गुलदार को कई बार आबादी के भीतर घूमते हुए देखा जा चुका है, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।
आधिकारिक जानकारी
शनिवार रात नवीता गुनसोला के घर के बाहर लगे सीसीटीवी में गुलदार और कुत्तों की भिड़ंत का वीडियो कैद हुआ। फुटेज में देखा गया कि गुलदार पहले घर के बाहर सड़क पर मंडराता है और फिर कुत्तों की आवाज सुनकर चहारदीवारी फांदते हुए छत की ओर बढ़ जाता है।
गुलदार छोटे कुत्ते को दबोचने की कोशिश करता है, लेकिन छत पर रखे गमले और अन्य सामान के गिरने से तेज आवाज होती है, जिससे वह घबरा जाता है। इसी दौरान छोटा कुत्ता तेजी से नीचे भागकर अपनी जान बचा लेता है। बड़ा कुत्ता लगातार भौंकता हुआ गुलदार को पीछे हटाता रहता है। थोड़ी देर बाद गुलदार वहां से भाग जाता है।
बड़कोट रेंज अधिकारी धीरज रावत ने बताया कि गुलदार कुत्तों और अन्य छोटे शिकार के पीछे आबादी क्षेत्र में आ रहा है। उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है और क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कई दिनों से मशरूम फैक्ट्री वाली सड़क और आसपास के घरों के पास गुलदार कई बार दिखाई दिया है। कई राहगीरों का उससे आमना-सामना भी हो चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है और भय का माहौल लगातार बढ़ रहा है।
ग्राम प्रधान मोहर सिंह असवाल ने कहा, “गुलदार की मौजूदगी से लोग डरे हुए हैं, लेकिन विभाग की ओर से सुरक्षा के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। पिंजरा चार दिन से खाली है और उसमें शिकार की व्यवस्था भी नहीं की गई है।”
आगे क्या
वन विभाग ने दावा किया है कि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पिंजरे की स्थान बदलने, चारा लगाने और रात्रि गश्त को और तेज करने पर विचार किया जा रहा है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि रात के समय अकेले बाहर न निकलें और किसी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना वन विभाग को दें।







