
देहरादून: पीआरडी जवानों को बड़ी राहत देते हुए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने निर्देश दिया है कि बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर उनका मानदेय छह महीने तक नहीं रोका जाएगा। सचिवालय के एफआरडीसी सभागार में हुई बैठक में उन्होंने अधिकारियों को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में पीआरडी जवान लंबे समय से स्थायी रोजगार, मानदेय वृद्धि और पदनाम परिवर्तन जैसी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। कई बार गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में लंबी छुट्टी लेने पर उनका मानदेय बंद हो जाने की शिकायत भी सामने आती रही है।
इन मुद्दों को देखते हुए विभाग ने इस बार पीआरडी जवानों के हित में नई पहल शुरू की है।
आधिकारिक जानकारी
बैठक के दौरान मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों से कहा कि यदि कोई पीआरडी जवान बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती रहता है, तो छह महीने तक उसका मानदेय नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग पीआरडी जवानों की सभी जायज मांगों पर सहानुभूति के साथ विचार करेगा।
पीआरडी जवानों की मुख्य मांगों में 365 दिन रोजगार और “स्वयंसेवक” शब्द हटाकर “कर्मचारी” शब्द का उपयोग शामिल है। मंत्री ने दोनों विषयों पर परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करने को अधिकारियों को निर्देशित किया।
सहायता राशि बढ़ाने पर भी विभाग जल्द निर्णय ले सकता है। बैठक में पीआरडी स्थापना दिवस (11 दिसंबर) की तैयारियों की समीक्षा भी की गई।
बैठक में विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, निदेशक आशीष चौहान और अपर निदेशक अजय अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कुछ पीआरडी जवानों ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि बीमारी के दौरान मानदेय बंद हो जाने से परिवारों पर आर्थिक संकट आ जाता है।
एक जवान ने कहा, “सरकार के इस निर्णय से हमें सुरक्षा और सम्मान दोनों का अहसास हुआ है। उम्मीद है कि आगे रोजगार स्थिरता पर भी सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।”
आगे क्या?
प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे औपचारिक स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद नियम लागू होंगे।
सरकार पीआरडी सेवा संरचना को व्यवस्थित करने, नौकरी के दिनों में बढ़ोतरी और सहायता राशि सुधार पर भी आगे निर्णय ले सकती है।
पीआरडी स्थापना दिवस पर विभाग जवानों के लिए कई नई घोषणाएँ भी कर सकता है।







