
पिथौरागढ़: सीमांत जिला पिथौरागढ़ में सामरिक महत्व की टनकपुर–तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के चौड़ीकरण ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रशासन द्वारा नोटिस जारी होने के बाद सड़क की जद में आ रहे करीब 480 भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को लेकर क्षेत्र में हलचल है। प्रभावित भवन स्वामियों और व्यापारियों का कहना है कि एक सप्ताह में मकान और दुकानें खाली करने का अल्टीमेटम बहुत कम है, जबकि कुछ परिवारों को अभी पूरा मुआवजा नहीं मिला है। वहीं प्रशासन का दावा है कि अधिकांश भुगतान हो चुका है और परियोजना को समय पर पूरा करना जरूरी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
टनकपुर–तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग भारत–चीन सीमा तक पहुंचने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। टनकपुर से पिथौरागढ़ तक लगभग 150 किमी सड़क ऑल वेदर बन चुकी है और पिथौरागढ़ से बलुवाकोट तक करीब 70 किमी हिस्से का चौड़ीकरण भी पूरा किया जा चुका है। अब बलुवाकोट के बिन्या गांव से तवाघाट तक 35 किमी हिस्से में चौड़ीकरण किया जाना है। आबादी वाले क्षेत्रों में मुआवजे की प्रक्रिया के कारण काम रुका हुआ था, जो अब भुगतान के बाद आगे बढ़ाया जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
प्रशासन के अनुसार, चौड़ीकरण की जद में आने वाले भवनों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने कहा कि नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया गया है। यदि कोई परिवार मुआवजे से वंचित रह गया है तो अधिकारियों को भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे। परियोजना को तय समय में पूरा करने के लिए कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रभावित लोगों का कहना है कि एक सप्ताह की समयसीमा अव्यावहारिक है। भवन स्वामियों और दुकानदारों ने कम से कम दो से तीन माह की मोहलत देने की मांग की है ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। व्यापारियों का कहना है कि अचानक दुकान खाली करने से रोज़गार पर असर पड़ेगा।
आंकड़े / तथ्य
बलुवाकोट के बिन्या गांव से तवाघाट तक 35 किमी लंबे एनएच हिस्से में कुल 480 भवन प्रभावित हैं, जिनमें मकान, दुकानें और गौशालाएं शामिल हैं। कुल मुआवजा राशि करीब 90 करोड़ रुपये तय की गई है। प्रशासन के मुताबिक 70 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 20 करोड़ रुपये अभी वितरित किए जाने हैं। कालिका, छारछुम समेत अन्य कस्बों में भी प्रभावित भवनों को खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
आगे क्या होगा
अधिकांश मामलों में भवनों का आगे का हिस्सा ही सड़क की जद में आ रहा है। कुछ भवन स्वामियों ने स्वयं ही आंशिक ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया है। स्थानीय निवासी एसएस दताल ने बताया कि उनके भवन का लगभग चार फीट हिस्सा प्रभावित था, जिसे उन्होंने मजदूर लगाकर हटा दिया है और उन्हें मुआवजा मिल चुका है। प्रशासन का कहना है कि भुगतान और हटाने की प्रक्रिया के साथ-साथ चौड़ीकरण कार्य को तेज़ी से आगे बढ़ाया जाएगा।





