
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (एमएसवाई) के क्रियान्वयन में पौड़ी जनपद ने प्रदेश स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। बैंकों के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के मामले में पौड़ी ने देहरादून और हरिद्वार जैसे मैदानी जिलों को भी पीछे छोड़ दिया है। चालू वित्तीय वर्ष में पौड़ी जिले ने एमएसवाई के तहत 67.45 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करते हुए सैकड़ों युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया है, जिससे जिले में रोजगार सृजन को मजबूती मिली है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य सरकार द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है, लेकिन पौड़ी जनपद ने इस दिशा में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है।
प्रशासनिक पक्ष
लीड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में पौड़ी जिले को एमएसवाई के तहत 725 का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष बैंकों ने 486 युवाओं को योजना का लाभ दिया है। खास बात यह है कि तय लक्ष्य से 154 अधिक आवेदनों को स्वीकृति दी गई। इस दौरान जिले के युवाओं को कुल 28.78 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय युवाओं का कहना है कि एमएसवाई योजना से उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला है। कई युवाओं ने ब्यूटी सैलून, जिम व फिटनेस सेंटर, मोबाइल रिपेयर और अन्य छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं, जिससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है।
आंकड़े / विवरण
लीड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 21 बैंकों को कुल 862 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 464 आवेदनों को बैंक ऋण स्वीकृत किया गया। योजना के तहत अधिकतम 25 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
एमएसवाई में सर्वाधिक आवेदन स्वीकृत करने वाले प्रमुख बैंक इस प्रकार रहे— यूजीबी ने 230 आवेदनों में से 142, एसबीआई ने 234 में से 138, जिला सहकारी बैंक ने 140 में से 95, पीएनबी ने 56 में से 36 और केनरा बैंक ने 59 में से 35 आवेदनों को स्वीकृति दी।
आगे क्या होगा
प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में और अधिक युवाओं को योजना से जोड़ने के लिए बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। लक्ष्य है कि स्वरोजगार के माध्यम से जिले में स्थायी आजीविका के अवसर पैदा किए जाएं और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सके।





