
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को पौड़ी गढ़वाल में प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल है, लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना पा रही है। पार्टी ने सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कुछ समय से उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भालू और गुलदार जैसे जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर आ रहे हैं। इन हमलों में मवेशियों के साथ-साथ इंसानों की जान भी जा रही है। बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते पहले ही पहाड़ों से पलायन बढ़ चुका है और अब जो लोग गांवों में रह रहे हैं, वे भी असुरक्षा के साये में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
आधिकारिक जानकारी
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार से मांग की कि जिन क्षेत्रों में गुलदार और अन्य जंगली जानवरों की सक्रियता अधिक है, वहां वन विभाग की निगरानी बढ़ाई जाए। संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त, विशेषज्ञ टीमों की तैनाती और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीण बिना भय के अपने दैनिक कार्य कर सकें। इस मामले में प्रशासन की ओर से अभी कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के डर से वे खेतों पर जाना छोड़ चुके हैं।
महिलाओं ने बताया कि जंगलों से चारा लाने में भी जान का खतरा बना रहता है, जिससे पशुपालन और खेती दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
राजनीतिक बयान
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार पहाड़ों में बचे हुए लोगों की सुरक्षा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार के पास न तो कोई ठोस नीति है और न ही प्रभावी कार्ययोजना।
जिला पंचायत सदस्य पूनम कैंतुरा ने कहा कि सरकार ग्रामीण जनता के प्रति उदासीन हो चुकी है और केवल बयानबाजी तक सीमित है।
आगे क्या?
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी। पार्टी का कहना है कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।





