
पौड़ी: उद्यान निदेशालय ने पौड़ी जिले में मधुमक्खी बॉक्स की कीमत तय कर दी है, जिससे लंबे समय से रुका मौन बॉक्स वितरण अब शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। आदेश जारी होने के बाद जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए सब्सिडी आधारित बॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न केवल मौन पालकों की दिक्कतें दूर होंगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय बढ़ाने को भी मजबूती मिलेगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
वित्तीय वर्ष के दौरान मधुमक्खी बॉक्स के दाम तय न होने के कारण पौड़ी जिले के कई विकासखंडों में किसानों को मौन बॉक्स नहीं मिल पा रहे थे। द्वारीखाल, यमकेश्वर, जयहरीखाल, पोखड़ा, नैनीडांडा और बीरोंखाल जैसे क्षेत्रों के किसानों ने उद्यान विभाग के सचल दल केंद्रों में मांग भेजी थी। रेट तय न होने और स्वीकृति न मिलने के चलते विभाग को बजट लौटाने की स्थिति तक बन गई थी।
आधिकारिक जानकारी
उद्यान निदेशालय की ओर से अब मधुमक्खी बॉक्स के दाम तय करने के साथ-साथ खरीद की स्वीकृति भी जारी कर दी गई है। इसके बाद पौड़ी जिले में मौन बॉक्स वितरण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी, जिससे किसानों को लंबे इंतजार के बाद राहत मिली है।
मधुमक्खी बॉक्स की कीमत और सब्सिडी
उद्यान विभाग की ओर से किसानों को मधुमक्खी सहित मौन बॉक्स 2000 रुपये की कीमत पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।
इस प्रकार किसानों को प्रति बॉक्स केवल 400 रुपये का भुगतान करना होगा।
यदि कोई किसान बाजार से स्वयं बॉक्स खरीदता है, तो उद्यान विभाग की ओर से उसे 1600 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्राम सभा दाबड़ के ग्राम प्रधान आनंद प्रकाश और ग्राम सभा कांडीखंड के ग्राम प्रधान मातबर नेगी ने मांग की है कि उद्यान विभाग गांवों में ही किसानों को मौन पालन का प्रशिक्षण दे। उनका कहना है कि इससे नए किसान भी मधुमक्खी पालन अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
विशेषज्ञ का बयान
उद्यान विशेषज्ञ पंकज कुमार पटवाल ने बताया कि निदेशालय से रेट तय होने और स्वीकृति मिलने के बाद अब जल्द ही किसानों को मधुमक्खी बॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे जिले में मौन पालन को नई गति मिलेगी।
आगे क्या होगा
अब उद्यान विभाग द्वारा मौन बॉक्स की खरीद और वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन देने की दिशा में भी कदम उठाए जाने की संभावना है, जिससे पौड़ी जिले में मधुमक्खी पालन को स्थायी आजीविका के रूप में विकसित किया जा सके।





