
मसूरी: विंटर लाइन कार्निवल से पहले मॉल रोड के मुख्य चौकों पर हो रहे निर्माण कार्य ने एक बार फिर सौंदर्यीकरण परियोजना को विवादों में ला दिया है। लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद अब पीडब्ल्यूडी द्वारा कोबल स्टोन उखाड़कर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने का फैसला स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी का कारण बन गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पहाड़ों की रानी के नाम से प्रसिद्ध मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद मॉल रोड पर सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण कार्य वर्षों से विवादों में रहे हैं। हाल ही में पूर्ण हुए 7 करोड़ रुपये के कार्यों के बाद भी चौकों को दोबारा खोदना लोगों को खटक रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लगातार बदलते निर्माण मॉडल शहर की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अधिकारिक जानकारी
पिक्चर पैलेस चौक और ग्रीन चौक पर लगे कोबल स्टोन के उखड़ने की शिकायतों के बाद पीडब्ल्यूडी ने इन्हें हटाकर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने की शुरुआत की है। सहायक अभियंता शिवराज सिंह लोदियाल का कहना है कि नगर पालिका की मांग पर यह बदलाव किया जा रहा है और नई टाइल्स उच्च गुणवत्ता की होंगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जनता की नाराज़गी को देखते हुए मुख्य सड़क पर डामरीकरण अथवा सीसी वर्क कराने पर उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सर्दियों में बर्फबारी के दौरान इंटरलॉकिंग टाइल्स फिसलन भरी साबित हो सकती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ेगा। निवासियों ने यह भी कहा कि 24 दिसंबर से शुरू होने वाले विंटर लाइन कार्निवल से ठीक पहले निर्माण स्थल और फैली सामग्री मसूरी की छवि खराब कर रही है।
जनप्रतिनिधियों के बयान
नगर पालिका के सभासद अमित भट्ट और जनप्रतिनिधि गौरव गुप्ता ने कहा कि विभाग बिना किसी ठोस योजना के बार-बार प्रयोग कर रहा है। कभी कोबल स्टोन, कभी टाइल्स—ऐसे फैसलों से जनता के पैसों की बर्बादी हो रही है। उन्होंने मांग की कि जवाबदेही तय करते हुए लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और ठेकेदार से भरपाई करवाई जाए।
भाजपा नेता के आरोप
भाजपा मंडल के मीडिया प्रभारी जगजीत कुकरेजा ने भी विभाग के निर्णयों को गलत बताया। उनका कहना है कि सरकार मसूरी के विकास के लिए करोड़ों रुपये दे रही है, लेकिन गलत तकनीकी फैसले शहर की साख को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
आगे क्या?
वन्यजीव संघर्ष और आग से निपटने की तरह ही, मसूरी में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता भी अब प्रशासन के सामने चुनौती बन चुकी है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने आगामी दिनों में वैकल्पिक निर्माण मॉडल पर विचार करने और जनता की आपत्तियों की समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। पर्यटन सीजन से पहले चौकों को दुरुस्त करने की समयसीमा को लेकर भी विभाग पर दबाव बढ़ गया है।





