
मसूरी: छावनी क्षेत्र के चार दुकान में आयोजित दो दिवसीय लंढौर मेला इस बार केवल एक पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक-संस्कृति, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को जोड़ने वाला प्रभावी मंच बनकर सामने आया है। ग्रीन लाइफ संस्था और छावनी परिषद लंढौर के सहयोग से आयोजित इस मेले में पहले ही दिन बड़ी संख्या में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी देखने को मिली। आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि स्थानीय उत्पादों को सही मंच मिले, तो वे देश-विदेश से आए पर्यटकों तक अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे चार दुकान क्षेत्र में आयोजित लंढौर मेला हर वर्ष स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास करता रहा है। इस वर्ष यह मेला अपने 11वें संस्करण में पहुंच चुका है। मेले का उद्देश्य केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों को सीधा बाजार उपलब्ध कराना है, ताकि पहाड़ का पैसा पहाड़ में ही रहे और स्थानीय लोग आत्मनिर्भर बन सकें।
आधिकारिक जानकारी
ग्रीन लाइफ संस्था के निदेशक विवेक वेणीवाल ने बताया कि लंढौर मेला स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सतत पर्यटन का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मेले में नेचर एक्टिविटी, आउटडोर कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल किया गया है, जिससे पर्यटकों को उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से पहाड़ी व्यंजन, हस्तशिल्प और ऑर्गेनिक उत्पादों को नई पहचान मिलती है। पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने बताया कि पहाड़ के कारीगरों और उत्पादकों को ऐसा मंच मिलना बेहद जरूरी है, जहां वे अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकें।
विशेषज्ञ / अधिकारी वक्तव्य
छावनी परिषद की सीईओ अंकिता सिंह ने कहा कि लंढौर मेला ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजनों से पहाड़ी कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा मिलता है, साथ ही देश-विदेश से आए पर्यटक यहां की संस्कृति को करीब से समझ पाते हैं।
संख्या / तथ्य
यह मेला इस वर्ष 11वीं बार आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय उत्पादक, कारीगर और उद्यमी शामिल हैं। पहले ही दिन सैकड़ों पर्यटकों और स्थानीय लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे स्थानीय कारोबार को लाभ मिला।
आगे क्या होगा
आयोजकों के अनुसार, आने वाले समय में लंढौर मेले को और व्यापक रूप देकर अधिक स्थानीय उत्पादकों को जोड़ने की योजना है। इस तरह के आयोजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और सतत पर्यटन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।







