
देहरादून: उत्तराखंड के मसूरी वन प्रभाग में हजारों सीमा स्तंभ गायब होने के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में विभाग ने करीब 25 वन कर्मियों से जवाब तलब किया है।
7375 सीमा स्तंभ गायब होने से मचा हड़कंप
पिछले वर्ष मसूरी वन प्रभाग में 7375 सीमा स्तंभ गायब होने का मामला सामने आया था, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
यह सीमा स्तंभ जंगलों की जमीन और सीमाओं की पहचान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
कर्मचारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने वन आरक्षी और वन दरोगा स्तर के करीब 25 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।
कुछ कर्मचारियों ने अपने जवाब जमा भी कर दिए हैं, जिनका परीक्षण किया जा रहा है।
केंद्र तक पहुंचा मामला
इस मामले को लेकर तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने उच्च अधिकारियों को जानकारी देने के साथ ही पर्यावरण मंत्रालय को भी पत्र लिखा था।
इसके बाद केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 2025 को राज्य सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी।
जांच समिति ने सौंपी रिपोर्ट
पूरे प्रकरण की जांच वन संरक्षक राजीव धीमान की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपी गई थी, जिसकी प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है।
मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल धीरज पांडे के अनुसार, जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है।
वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल
इतनी बड़ी संख्या में सीमा स्तंभ गायब होना प्रशासनिक लापरवाही या किसी बड़े गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद जिम्मेदारी किस पर तय होती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा स्तंभों का गायब होना वन भूमि अतिक्रमण जैसे गंभीर मामलों को जन्म दे सकता है।
इसलिए मामले में सख्त कार्रवाई की जरूरत है।







