
मसूरी। घनानंद इंटर कॉलेज के पास देर शाम एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खाई की ओर लुढ़कने लगी। कार गहरी खाई में गिरने ही वाली थी कि बीच में घने पेड़ों के बीच फंसकर रुक गई, जिससे चालक 63 वर्षीय उदय सिंह की जान बच गई। हादसे में चालक गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि एंबुलेंस और पुलिस के देर से पहुंचने पर स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी फैल गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मसूरी में सर्दियों के दौरान सड़कें कई जगह फिसलन भरी और संकरी रहती हैं, जिसके चलते दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है। पर्यटन सीजन में यातायात भी अधिक रहता है, ऐसे में किसी भी हादसे में त्वरित राहत पहुंचना बेहद आवश्यक होता है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा और दुर्घटनाओं से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत है।
आधिकारिक जानकारी
स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे की सूचना मिलने के बाद 108 एंबुलेंस और पुलिस दोनों को फोन किया गया, लेकिन एक घंटे बाद भी कोई मौके पर नहीं पहुंचा। घायल चालक को लोगों ने ही अपनी जिम्मेदारी पर कार से बाहर निकाला और निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया।
108 सेवा के जिला प्रबंधक विलम यादव ने कहा कि एक एंबुलेंस खराब है और दूसरी कोलुखेत में इस्तेमाल हो रही थी। उन्होंने बताया कि मसूरी की इस घटना की जानकारी उन्हें देर से मिली और मामले की जांच की जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
घटना के बाद इलाके में एंबुलेंस और पुलिस की देरी को लेकर आक्रोश है। स्थानीय निवासी संजय टम्टा और पूर्व सभासद प्रताप पंवार ने मसूरी की व्यवस्थाओं को पूरी तरह फेल बताते हुए कहा कि दुर्घटनाओं में राहत समय पर न मिलना गंभीर लापरवाही है। उनका कहना था कि सरकार भले ही सभी विभागों को दुर्घटना के दौरान अलर्ट रहने के निर्देश देती है, लेकिन जमीन पर इसका पालन दिखाई नहीं देता। लोगों का मानना है कि यदि वे स्वयं मौके पर सक्रिय नहीं होते, तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे।
विशेषज्ञ / संबंधित पक्ष की टिप्पणी
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पर्यटकीय शहर मसूरी में एंबुलेंस का समय पर न पहुंचना बड़ी प्रशासनिक चूक है। पहाड़ी क्षेत्रों में हर सेकेंड महत्वपूर्ण होता है और समय पर मेडिकल सहायता न मिलना किसी की जान के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। लोगों ने कहा कि ऐसी घटनाएं दर्शाती हैं कि आपातकालीन सेवाओं की वास्तविक स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है।
आंकड़े / तथ्य
मसूरी क्षेत्र में 108 एंबुलेंस के सीमित संसाधन अक्सर सवालों के घेरे में रहते हैं। कई बार एंबुलेंस एक ही समय में कई जगहों पर फंस जाती है और दूसरी यूनिट उपलब्ध नहीं होती। इस घटना में भी प्रशासनिक समन्वय की कमी साफ दिखाई दी, क्योंकि पुलिस भी समय पर मौके पर नहीं पहुंची।
आगे क्या?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस लापरवाही की जवाबदेही तय की जाए और एंबुलेंस कर्मियों तथा संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो। फिलहाल चालक का अस्पताल में उपचार चल रहा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।





