
देहरादून। शहर में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण और बिना मानक प्लाटिंग पर अब मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) तकनीक के सहारे सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। प्राधिकरण ने ड्रोन सर्विलांस सिस्टम को सक्रिय करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत शहर के संवेदनशील क्षेत्रों की रियल टाइम निगरानी होगी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून में अनियंत्रित निर्माण, अवैध प्लाटिंग और नियमों की अनदेखी लंबे समय से बड़ी समस्या बनती जा रही है। तेजी से बढ़ते शहरी फैलाव और अनियमित विकास ने शहर के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ाया है। यातायात, पार्किंग और सुरक्षा से जुड़े संकटों के बीच अब यह आवश्यक हो गया है कि अवैध गतिविधियों पर तकनीक के माध्यम से कड़ी निगरानी की जाए। इसी उद्देश्य से एमडीडीए ने ड्रोन आधारित सर्विलांस को अपनाया है।
आधिकारिक जानकारी
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि ड्रोन के माध्यम से ऊंचाई से हाई-रिजॉल्यूशन वीडियो और फोटो लिए जाएंगे, जिन्हें केस फाइल में डिजिटल सबूत के रूप में भी शामिल किया जाएगा।
अक्सर शिकायत मिलने के बाद मौके पर पहुंचते-पहुंचते निर्माणकर्ता सबूत मिटा देते हैं या कार्य बंद कर देते हैं। ड्रोन निगरानी से इस समस्या का समाधान होगा और छिपकर किए जा रहे निर्माण, खेतों में प्लाटिंग, या गली-मोहल्लों में अवैध गतिविधियां आसानी से पकड़ी जा सकेंगी।
प्राधिकरण ने विशेष फ्लाइंग सर्विलांस प्लान तैयार किया है, जिसके तहत लगातार शिकायत वाले क्षेत्रों में ड्रोन टीम हर सप्ताह रिपोर्ट सौंपेगी और उसके आधार पर सीलिंग, ध्वस्तीकरण और दंडात्मक कार्रवाई तेज की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शहर के कई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का मानना है कि अवैध निर्माण और प्लाटिंग ने देहरादून की संरचना को काफी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय नागरिकों ने ड्रोन तकनीक को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि यदि इसे सख्ती से लागू किया गया तो यह अनियंत्रित विकास पर रोक लगाने में प्रभावी साबित होगा। कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा कि अवैध कार्यों के कारण मानक के अनुसार निर्माण करने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है, इसलिए यह कदम स्वागत योग्य है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन आधारित निरीक्षण आधुनिक शहरी प्रबंधन की महत्वपूर्ण जरूरत है। ड्रोन से प्राप्त रियल टाइम डेटा न केवल अवैध निर्माण को पहचानने में मदद करता है, बल्कि पूरे शहर की विकासात्मक गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार करता है। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि यह प्रणाली पूरी तरह डिजिटल इंटीग्रेशन के साथ लागू हुई, तो देहरादून में निर्माण गतिविधियों का मॉनिटरिंग स्ट्रक्चर मजबूत होगा।
आंकड़े / तथ्य
प्राधिकरण के अनुसार हाल के महीनों में दो मंजिल नियम उल्लंघन, स्टिल्ट पार्किंग को दुकानों में बदलने और खेतों में अवैध प्लाटिंग के कई मामले सामने आए हैं।
शिमला बाईपास, रायपुर, सहस्रधारा रोड, सहसपुर, सेलाकुई, ऋषिकेश रोड, पौंधा, हर्रावाला और डोईवाला को इस निगरानी व्यवस्था में प्राथमिकता दी गई है।
ड्रोन से प्राप्त फुटेज को केस फाइल में मुख्य डिजिटल सबूत माना जाएगा।
आगे क्या?
प्राधिकरण ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में शहर के सभी क्षेत्रों को ड्रोन ग्रिड से जोड़ा जाएगा। संवेदनशील इलाकों की मैपिंग पहले चरण में की जाएगी और धीरे-धीरे पूरी देहरादून की निगरानी प्रणाली को डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जाएगा। एमडीडीए का दावा है कि इस तकनीक से अवैध निर्माण को काफी हद तक रोकने में मदद मिलेगी और नियमों के अनुरूप विकास को मजबूती मिलेगी।





