
धर्म डेस्क: साल 2025 अपने अंतिम चरण में है और इसी के साथ धर्म और आस्था के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मार्गशीर्ष पूर्णिमा का पावन दिन भी निकट आ रहा है। सनातन परंपराओं में पूर्णिमा तिथि को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। मान्यता है कि इस दिन की गई साधना, व्रत और दान से साधक के जीवन में सुख-शांति बढ़ती है तथा श्रीहरि विष्णु की कृपा से बाधित कार्य भी पूर्ण होने लगते हैं।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार साल की अंतिम पूर्णिमा 04 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी।
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 04 दिसंबर को सुबह 08:37 बजे,
और समापन 05 दिसंबर को सुबह 04:43 बजे होगा।
इस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:19 बजे से 04:58 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में की गई पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी जाती है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दान का महत्व
सनातन परंपरा में मार्गशीर्ष पूर्णिमा को दान का दिन भी कहा गया है। यह माना जाता है कि पूर्ण श्रद्धा से किया गया दान साधक के जीवन में समृद्धि का मार्ग खोलता है। इस दिन की गई सत्कर्म और सहायता से धन, अन्न और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
क्या करें दान
आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए पूर्णिमा पर गुड़ का दान अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि मंदिर में या जरूरतमंद लोगों को गुड़ दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है।
इन बातों का रखें ध्यान
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक बताया गया है, अन्यथा साधक को अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है और मां लक्ष्मी की कृपा में कमी आ सकती है। इस दिन घर और मंदिर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि जहां स्वच्छता होती है, वहीं देवी लक्ष्मी का निवास होता है। तामसिक भोजन ग्रहण करना वर्जित माना गया है और पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से भी बचना चाहिए।
भगवान विष्णु के महत्वपूर्ण मंत्र
ज्येष्ठ ग्रंथों में बताया गया है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ फल देता है।
ॐ नमोः नारायणाय॥
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥







