
देहरादून: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तराखंड के शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। प्रदेशभर में ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ हजारों भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। देहरादून सहित पर्वतीय और मैदानी जिलों के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु पंचामृत, गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प लेकर पहुंचे। विशेष बात यह रही कि इस वर्ष महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट से प्रारंभ होकर 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसी अवधि में महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जा रहा है।
मंदिरों में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, सफेद पुष्प, बेलपत्र, कमलगट्टा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। कई स्थानों पर चारों प्रहर की विशेष पूजा और रात्रि जागरण का आयोजन भी किया गया।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात योग भी बन रहे हैं। ग्रह-नक्षत्रों की यह स्थिति महाशिवरात्रि को विशेष फलदायी बना रही है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
प्रदेश के प्रमुख शिवालयों में भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। देहरादून समेत विभिन्न जिलों में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी और बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व शिव और शक्ति की आराधना का प्रतीक है तथा समाज में प्रेम, एकता और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून और अन्य जिलों के मंदिरों में पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि महाशिवरात्रि उनके लिए आस्था और आत्मशुद्धि का अवसर है। कई भक्तों ने बताया कि वे हर वर्ष इस दिन व्रत रखकर रात्रि में विशेष पूजन करते हैं।
आंकड़े और तथ्य
महाशिवरात्रि पर प्रदेशभर के सैकड़ों छोटे-बड़े शिवालयों में विशेष आयोजन किए गए। प्रमुख मंदिरों में सुबह से लेकर देर रात तक जलाभिषेक का क्रम जारी रहा। धार्मिक संगठनों के अनुसार इस बार शुभ योगों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
आगे क्या होगा
मंदिर समितियों के अनुसार शिवरात्रि के बाद भी कई स्थानों पर सप्ताह भर तक धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन भीड़ को देखते हुए व्यवस्था की समीक्षा करता रहेगा।
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