
हरिद्वार। माघ मकर संक्रांति स्नान पर्व की शुरुआत घने कोहरे और भयंकर ठंड के बीच हुई, लेकिन आस्था की गर्माहट के आगे मौसम फीका पड़ गया। तड़के से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर की पैड़ी समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान-दान और पूजा के लिए पहुंचे। ढोल-दमाऊं की थाप के साथ देव डोलियों को लाया गया और विधिवत गंगा स्नान कराया गया। भीषण ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और घाटों पर आरती व पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है, जिसे शास्त्रों में विशेष पुण्यदायी माना गया है। गंगा तटों पर इस दिन स्नान-दान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस वर्ष पर्व का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि संक्रांति के साथ एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
धार्मिक महत्व और मुहूर्त
नारायण ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य आचार्य विकास जोशी के अनुसार बुधवार को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। उत्तरायण काल को शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य और दान विशेष फलदायी रहता है। सुबह स्नान कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है।
सिद्धि योग और विशेष संयोग
इस दिन सुबह 7 बजकर 31 मिनट से रात 3 बजकर 04 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। साथ ही चतुर्ग्रही योग और वृद्धि योग का संयोग भी है, जिससे दिन और अधिक शुभ माना जा रहा है। इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। यह शुभ संयोग करीब 23 वर्ष बाद बन रहा है, जिसे ज्योतिष के अनुसार अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
श्रद्धालुओं का कहना है कि ठंड और कोहरे के बावजूद गंगा स्नान से मन को विशेष शांति मिली। कई परिवारों ने तिल-गुड़ का दान किया और जरूरतमंदों को कंबल व वस्त्र वितरित किए। घाटों पर सुबह से ही भजन-कीर्तन और आरती का माहौल रहा।
क्या करें और क्या न करें
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मकर संक्रांति पर स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना, जल में गुड़ या लाल फूल डालना, तिल-गुड़ का दान करना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र या कंबल दान करने से पुण्य फल बढ़ता है।
आगे क्या होगा
माघ माह के दौरान आने वाले प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए प्रशासन घाटों पर व्यवस्थाएं बनाए रखेगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।







