
लक्ष्मणझूला (ऋषिकेश): लक्ष्मणझूला थाना क्षेत्र में पुलिस ने रिजॉर्ट और कैंपों में काम करने वाले श्रमिकों के सत्यापन को लेकर सघन जांच अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान 20 रिजॉर्ट ऐसे मिले जहाँ श्रमिक बिना सत्यापन के काम कर रहे थे। पुलिस ने सभी संचालकों का चालान किया और दोबारा सत्यापन न मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
क्षेत्र में बाहरी राज्यों और जिलों से बड़ी संख्या में श्रमिक मौसमी रोजगार के लिए आते हैं। स्थानीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा नियमित सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसके बावजूद कई रिजॉर्ट संचालक श्रमिकों का सत्यापन नहीं करा रहे थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे थे।
अभियान कैसे चला
सोमवार को श्रमिक सत्यापन की जांच के लिए पुलिस ने आठ टीमों का गठन किया। टीमें मोहन चट्टी, घट्टूघाट, कुनाऊ, स्वर्गाश्रम जौंक और नीलकंठ क्षेत्रों में पहुंचीं। जांच के दौरान नीलकंठ में दो, मोहनचट्टी में पांच, किरमोला में चार, स्वर्गाश्रम जौंक में पांच और चीला में चार रिजॉर्ट ऐसे पाए गए जहाँ श्रमिक बिना दस्तावेज़ और बिना सत्यापन के काम करते मिले।
पुलिस ने इन सभी रिजॉर्ट संचालकों पर कुल 1 लाख 70 हजार रुपये का चालान किया और तत्काल सत्यापन कराने के निर्देश दिए। कई श्रमिकों के दस्तावेज़ अधूरे मिले, जबकि कुछ के बारे में संचालकों को भी सही जानकारी नहीं थी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियाँ तेज होने के साथ बाहरी लोगों की आवाजाही भी बढ़ जाती है। ऐसे में श्रमिक सत्यापन न होना सुरक्षा के लिहाज से खतरा पैदा कर सकता है। लोगों का कहना है कि कई बार बिना सत्यापन वाले श्रमिकों की वजह से क्षेत्र में चोरी, विवाद या अन्य घटनाएं देखने को मिली हैं।
अधिकारियों का बयान
थानाध्यक्ष संतोष पैथवाल ने कहा कि श्रमिक, किरायेदार और बाहरी लोगों का सत्यापन आंतरिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय लोगों और रिजॉर्ट संचालकों से अपील की कि बिना सत्यापन किसी को काम पर न रखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा और अगली जांच में गड़बड़ी मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चेकिंग में एसआई लक्ष्मण कुंवर, उत्तम रमोला, हेमकांत सेमवाल, राजेश असवाल, सुरेंद्र, मनोज, अशोक, नरेश पंवार, सुवर्धन, रविंद्र भोज, महेंद्र रावत, देवेंद्र, राजीव, राजेंद्र और पंकज शामिल थे।







