
डोईवाला — लच्छीवाला वन रेंज क्षेत्र में बढ़ती मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने प्रोजेक्ट सह-जीवन की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य मानव गतिविधियों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाना है, ताकि संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके। हाथी, तेंदुआ, हिरण जैसे वन्यजीवों की नियमित आवाजाही वाले इस क्षेत्र में कचरा, खुले भोजन स्रोत और जागरूकता की कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह परियोजना शुरू की गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
लच्छीवाला वन रेंज देहरादून जिले के उन संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही आबादी वाले इलाकों के नजदीक बनी रहती है। बीते कुछ वर्षों में मानवीय गतिविधियों के विस्तार के साथ मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे जनसुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों प्रभावित हुए हैं।
आधिकारिक जानकारी
लच्छीवाला वन क्षेत्राधिकारी मेधावी कीर्ति ने बताया कि प्रोजेक्ट सह-जीवन के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे वन क्षेत्रों के आसपास कचरा, भोजन और प्लास्टिक न फेंकें, खुले में खाद्य सामग्री न छोड़ें और वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें। उन्होंने कहा कि विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने से संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
तकनीकी पहल
वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस के साथ-साथ सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली का भी ट्रायल किया जा रहा है। इन तकनीकी उपायों से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने और समय रहते आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जागरूकता और निगरानी को गंभीरता से लागू किया गया, तो इससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं से भी राहत मिलेगी।
आगे क्या?
वन विभाग का कहना है कि प्रोजेक्ट सह-जीवन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। लोगों की भागीदारी और तकनीकी सहयोग से इसे एक स्थायी मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे सुरक्षित पर्यावरण, संरक्षित वन्यजीव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिल सके।







