
रुद्रप्रयाग: ऊखीमठ स्थित पंचकेदार गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर में बृहस्पतिवार को मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ केदार शीतकालीन यात्रा-2025 का भव्य शुभारंभ किया गया। शीतकालीन धार्मिक यात्रा शुरू हुए करीब डेढ़ महीना होने वाला है और अब तक लगभग 4000 यात्री उत्तराखंड पहुंच चुके हैं, जिससे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में शीतकालीन धार्मिक यात्राएं हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। पंचकेदार की परंपरा का यह महत्वपूर्ण हिस्सा न केवल आध्यात्मिक रूप से विशेष माना जाता है, बल्कि स्थानीय लोगों की आर्थिकी से भी सीधा जुड़ा होता है। पिछले वर्षों में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे स्थानीय व्यापार, परिवहन और आवास व्यवस्था को बढ़ावा मिलता रहा है।
औपचारिक जानकारी
शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, बदरी–केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण और जिलाधिकारी प्रतीक जैन द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के बाद किया गया। विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि वे भगवान ओंकारेश्वर से क्षेत्र व प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और इस वर्ष अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि यात्रा को ध्यान में रखते हुए सड़क, पेयजल, बिजली, सुरक्षा, पार्किंग और अन्य सभी व्यवस्थाओं को पहले से दुरुस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा से स्थानीय लोगों की आजीविका को स्थिरता मिलती है और यह जिले की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
ओंकारेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग ने बताया कि यह पंचकेदार की गद्दी स्थली है और यहां दर्शन करने से भगवान केदारनाथ के समान पुण्य प्राप्त होता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि शीतकालीन यात्रा शुरू होने से ऊखीमठ और आसपास के बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है। व्यापारियों ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती संख्या से स्थानीय उत्पादों और सेवाओं की बिक्री में भी इजाफा हुआ है। एक श्रद्धालु ने कहा कि ओंकारेश्वर मंदिर का दिव्य वातावरण और पारंपरिक कलश यात्रा इस आयोजन को और विशेष बना देती है।
विशेष आयोजन और प्रदर्शनियाँ
यात्रा के शुभारंभ के साथ ही स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने स्थानीय उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई। इन स्टॉलों में शॉल, ऊनी वस्त्र, जूस, अचार, दालें और धूपबत्ती जैसे कई उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन और मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने सभी स्टालों का निरीक्षण किया और महिलाओं के कार्य की प्रशंसा की। सीडीओ रावत ने कहा कि इस प्रकार की पहल से स्थानीय उत्पादों को संरक्षण मिलता है और ग्रामीण महिलाओं के लिए नए रोजगार अवसर भी पैदा होते हैं।
डेटा / संख्याएँ
- 4000 से अधिक यात्री अब तक शीतकालीन धार्मिक यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंच चुके।
- कई स्वयं सहायता समूहों ने स्टॉल लगाए—जीवन ज्योति, उन्नति, नवकिरण, उड़ान और उमंग सहित।
- प्रदर्शनी में दर्जनों स्थानीय उत्पादों का विक्रय किया गया।
आगे क्या?
प्रशासन ने बताया कि आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, सुविधा और आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा। स्थानीय उत्पादों के प्रचार के लिए आगामी दिनों में भी प्रदर्शनी लगाने की योजना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।







