
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की विधायक आशा नौटियाल ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित भ्रामक और अनर्गल वीडियो के जरिए उनकी छवि धूमिल किए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग को शिकायती पत्र भेजा है। विधायक का कहना है कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार, झूठे और तथ्यहीन हैं। मामले को लेकर पुलिस ने प्रारंभिक स्तर पर तथ्यों की जांच शुरू कर दी है और विधिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट के जरिए जनप्रतिनिधियों की छवि को प्रभावित करने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में बिना प्रमाण के आरोप न केवल सामाजिक माहौल को प्रभावित करते हैं, बल्कि कानूनी जटिलताएं भी पैदा करते हैं।
शिकायत में क्या कहा विधायक ने
शिकायती पत्र में विधायक आशा नौटियाल ने उल्लेख किया कि कुछ तथाकथित महिलाओं द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से यह आरोप लगाया गया कि वे जनता के बीच जाकर महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करती हैं। विधायक ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा कभी ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक से उनका गहरा जुड़ाव है और क्षेत्र की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता रही है। उनके अनुसार, जनता के बीच उनकी स्वच्छ और सकारात्मक लोकप्रियता से असहज होकर कुछ लोग इस तरह का दुष्प्रचार कर रहे हैं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच
इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रबोध कुमार घिल्डियाल ने बताया कि विधायक की ओर से प्राप्त शिकायती पत्र के आधार पर स्थानीय स्तर पर पत्रकारों से जानकारी ली गई है और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की गहन जांच की गई है। प्रारंभिक जांच में ऐसा कोई तथ्य या वक्तव्य सामने नहीं आया है, जिससे यह सिद्ध हो कि विधायक द्वारा महिलाओं के प्रति किसी प्रकार की अशोभनीय या आपत्तिजनक टिप्पणी की गई हो।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के फैलने वाली सूचनाएं भ्रम पैदा करती हैं। जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों—दोनों के लिए आवश्यक है कि तथ्यों के आधार पर ही कोई टिप्पणी या साझा किया जाने वाला कंटेंट सामने आए।
आगे क्या होगा
पुलिस के अनुसार, शिकायती पत्र के आधार पर प्रकरण की विधिक जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आवश्यक वैधानिक कदम उठाए जाएंगे। पुलिस ने आम जनमानस से अपील की है कि बिना तथ्यों और प्रमाणों के किसी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि के विरुद्ध टिप्पणी करना अनुचित है और इससे कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।







