
देहरादून: पारंपरिक लोक खेलों को बढ़ावा देने की पहल के तहत इस वर्ष मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी में पहली बार ‘कंचे’ को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। आधुनिक खेलों के बीच खोते जा रहे इस पारंपरिक खेल को बड़ा मंच मिलने से गांवों और कस्बों के खिलाड़ी बेहद उत्साहित हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कंचे उत्तर भारतीय गलियों और मोहल्लों का पुराना और लोकप्रिय खेल रहा है। समय के साथ मोबाइल गेम्स और आधुनिक खेलों के बढ़ते प्रभाव के चलते इसकी लोकप्रियता कम हुई। ऐसे में आयोजन समिति ने लोक खेलों को पुनर्जीवित करने और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे प्रतियोगिता का हिस्सा बनाया है।
आधिकारिक जानकारी
मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी के आयोजकों ने बताया कि इस बार कंचे को प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है। यह खेल पूर्ण नियमों के साथ आयोजित होगा और विजेताओं को पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
प्रतिभागियों को निम्न तकनीकी कौशल दिखाने होंगे—
- टीपा
- डायरेक्ट शॉट
- लाइन हिट
- मार्बल कंट्रोल
आयोजन समिति का कहना है कि यह प्रतियोगिता इस संदेश के साथ की जा रही है कि लोक खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एकाग्रता, रणनीति और कौशल की उच्च स्तर की मांग करते हैं।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
कंचे को आधिकारिक प्रतियोगिता में शामिल किए जाने के बाद खिलाड़ियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। कई गांवों में अभ्यास शुरू कर दिया गया है और पंजीकरण की संख्या भी उम्मीद से कहीं अधिक पहुंच गई है।
विशेष बात यह है कि इस बार महिला और बालिका प्रतिभागियों ने भी बड़ी संख्या में नामांकन कराया है। ग्रामीण इलाकों में इससे उत्साह का माहौल है क्योंकि पहली बार उनके कौशल को राज्यस्तरीय पहचान मिल रही है।
आगे क्या
चैंपियनशिप के लिए चयनित खिलाड़ी जिला स्तर से राज्य स्तर तक अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन समिति ने कहा है कि आने वाले वर्षों में और भी पारंपरिक खेलों को प्रतियोगिता में शामिल किया जा सकता है, ताकि उत्तराखंड की लोक खेल संस्कृति को नया जीवन मिल सके।







