
ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर में गुरुवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी शीतकाल के लिए विधिवत विराजित कर दी गई। अब छह माह तक गद्दी के दर्शन यहीं होंगे। गद्दी का पांडुकेश्वर से ज्योतिर्मठ आगमन सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद प्रति वर्ष देव विग्रहों और गद्दियों का शीतकालीन प्रवास शुरू होता है। परंपरा के अनुसार नरसिंह मंदिर जोशीमठ में शंकराचार्य गद्दी के दर्शन और पूजा-अर्चना शीतकाल के दौरान होती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और क्षेत्र की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
गद्दी का पांडुकेश्वर से प्रस्थान
गुरुवार प्रातः योग ध्यान बदरी मंदिर, पांडुकेश्वर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गद्दी यात्रा शुरू हुई। धाम के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी की अगुवाई में डोली ज्योतिर्मठ की ओर रवाना हुई। सैकड़ों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा के दौरान उपस्थित रहे और गद्दी की पूजा-अर्चना की।
ज्योतिर्मठ में भव्य स्वागत
ज्योतिर्मठ पहुंचने पर नृसिंह मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने फूल वर्षा कर गद्दी का स्वागत किया।
गद्दी के साथ—
- मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी
- धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल
- मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान
- वेदपाठी आचार्यगण
- बीकेटीसी पदाधिकारी
भी मौजूद रहे।
स्थानीय विद्यालयों के बच्चे भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
गद्दी का विराजमान होना
पूजा-अर्चना के बाद शंकराचार्य गद्दी को नृसिंह मंदिर के समीप स्थित पौराणिक मठागण में विराजित किया गया। अब पूरी शीतकालीन अवधि में गद्दी के दर्शन जोशीमठ में ही होंगे, जबकि भगवान श्री हरि नारायण के शीतकालीन दर्शन पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर में सम्पन्न होंगे।
उद्धव जी और कुबेर जी पहले ही पांडुकेश्वर में विराजमान
परंपरा के अनुसार भगवान कृष्ण के सखा उद्धव जी और देवताओं के खजांची कुबेर जी बुधवार को अपनी शीतकालीन गद्दियों पर पांडुकेश्वर में विराजमान हो गए। उद्धव जी योग-ध्यान बदरी मंदिर में और कुबेर जी अपने मूल मंदिर में प्रतिष्ठित किए गए।
चारधाम यात्रा 2025 का समापन
आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी के ज्योतिर्मठ पहुंचने के साथ ही चारधाम यात्रा 2025 का औपचारिक समापन भी हो गया है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह अवधि अब शीतकालीन पूजा और स्थानीय अनुष्ठानों को समर्पित रहेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
एक श्रद्धालु ने कहा, “गद्दी का आगमन हमारे लिए वर्ष का सबसे पावन क्षण होता है। यहाँ पूरे गाँव का माहौल आध्यात्मिक हो जाता है।”
आगे क्या
अब ज्योतिर्मठ में शीतकालीन पूजा, अनुष्ठान और परंपरागत में उत्सव शुरू होंगे। मंदिर समिति ने कहा कि सभी व्यवस्थाएं बीकेटीसी के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित की जाएंगी।







