
ज्योतिर्मठ: श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दो दिन बाद गुरुवार को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी योग बदरी पांडुकेश्वर से भक्तिमय उदघोष के साथ ज्योतिर्मठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर पहुँच गई। गद्दी के आगमन पर मंदिर समिति, प्रशासन और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति से स्वागत किया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हर वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद देव डोलियाँ और शीतकालीन पूजाओं से जुड़े प्रतीकात्मक स्वरूप निर्धारित स्थलों की ओर प्रस्थान करते हैं। पांडुकेश्वर और ज्योतिर्मठ शीतकालीन पूजा व्यवस्था के प्रमुख केंद्र हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार देव विग्रह, गद्दी और पूजा पद्धतियाँ सुरक्षित रूप से संपन्न होती हैं।
गद्दी का आगमन और श्रद्धालुओं का स्वागत
गुरुवार को सेना के बैंड, धार्मिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय परिवेश के बीच आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी श्री नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ पहुँची। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने गद्दी के आगमन पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ दीं।
ज्योतिर्मठ पहुँचने पर गद्दी का स्वागत बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान, और मंदिर समिति के अन्य पदाधिकारियों ने किया। पूजा-अर्चना के बाद गद्दी शीतकालीन स्थल में विराजमान हो गई, जहाँ अब पूरे शीतकाल में दर्शन और पूजा-अनुष्ठान संपन्न होंगे।
मार्ग में भव्य स्वागत
आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी का गोविंद घाट, विष्णुप्रयाग, मारवाड़ी सेना कैंप और लोअर मार्केट ज्योतिर्मठ में भक्तिमय स्वागत किया गया। कई स्थानों पर स्थानीय समुदाय और पंचायतों ने धाम परंपराओं के अनुसार गद्दी की अगवानी की।
गरुड़ जी की देव डोली मंगलवार शाम पहुँची
इससे पूर्व बुधवार देर शाम भगवान नारायण के वाहन श्री गरुड़ जी महाराज की देव डोली भी बदरीनाथ धाम से ज्योतिर्मठ पहुँची।
रैंकवाल पंचायत के पदाधिकारियों—अनूप पंवार, सोनू बजवाड़ी, देवेंद्र पंवार और आलोक पंवार—ने डोली को धाम से ज्योतिर्मठ तक पहुंचाया। देवपुजाई समिति के नेतृत्व में गरुड़ जी का भव्य स्वागत किया गया। उसी रात भगवान नारायण का पवित्र खजाना भी ज्योतिर्मठ पहुंच गया।
शीतकालीन पूजा व्यवस्थाएँ शुरू
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी हरीश गौड़ के अनुसार—
- 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद
- 26 नवंबर को श्री उद्धव जी और श्री कुबेर जी की देव डोली योग बदरी पांडुकेश्वर पहुँची
- कुबेर जी पांडुकेश्वर स्थित अपने शीतकालीन मंदिर में विराजमान हुए
27 नवंबर की दोपहर में आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी भी ज्योतिर्मठ पहुँच गई। गद्दी के साथ रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान और वेदपाठी आचार्य भी उपस्थित रहे।
रावल अमरनाथ नंबूदरी ने की पूजा-अर्चना
शाम को बदरीनाथ के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने गढ़वाल स्काउट परिसर स्थित माँ दुर्गा और भगवान विष्णु मंदिर में पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर सेना के अधिकारी, मंदिर समिति और उपस्थित आचार्यों ने रावल जी का स्वागत किया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि शीतकालीन पूजा व्यवस्थाओं का ज्योतिर्मठ पहुँचना क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध करता है।
एक श्रद्धालु ने कहा, “गद्दी और देव डोलियों का आगमन हर साल हमारे लिए आध्यात्मिक उत्सव की तरह होता है।”
आगे क्या
अब श्री नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ में शीतकालीन पूजाएँ नियमित रूप से संपन्न होंगी। श्रद्धालु यहाँ दरबार और पूजा-अनुष्ठान में शामिल हो सकेंगे। मंदिर समितियाँ शीतकाल के दौरान सभी व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगी।







