
Jaya Ekadashi 2026 का पावन व्रत आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार जया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित विशेष तिथि मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पापों का क्षय होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। ऋषिकेश सहित उत्तराखंड के विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों में आज सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना और विष्णु सहस्रनाम पाठ का सिलसिला जारी है।
जया एकादशी 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में यह जानने की उत्सुकता रहती है कि मूहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और व्रत पारण का समय क्या है। यहां हम आपको स्थानीय परंपराओं और वर्तमान पंचांग मान्यताओं के आधार पर संपूर्ण जानकारी दे रहे हैं, ताकि व्रत सही विधि से और फलदायी रूप में संपन्न हो सके।
जया एकादशी 2026 का महत्व
जया एकादशी का व्रत विशेष रूप से विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि इस व्रत के पालन से पूर्वजन्म के दोष समाप्त होते हैं और जीवन में शांति व स्थिरता आती है। ऋषिकेश में गंगा तट पर स्नान कर व्रत रखने की परंपरा भी प्रचलित है, जिसे आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु निभाते हैं।
जया एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त
जया एकादशी 2026 के दिन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल माना गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। चूंकि मुहूर्त क्षेत्रीय पंचांग पर निर्भर करता है, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने नजदीकी मंदिर या पंचांग से समय की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।
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जया एकादशी पूजा विधि
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पीले फूल, तुलसी दल और दीप अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या नारायण कवच का पाठ करें। दिनभर फलाहार या निर्जला व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य अनुसार नियमों का पालन करते हैं।
जया एकादशी के मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप जया एकादशी पर विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त “ॐ विष्णवे नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
जया एकादशी व्रत कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में गंधर्व युगल को श्रापवश पिशाच योनि में जन्म लेना पड़ा था। जया एकादशी का व्रत रखने से उन्हें श्राप से मुक्ति मिली। तभी से यह एकादशी पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।
जया एकादशी आरती
पूजा के अंत में विष्णु जी की आरती करना अनिवार्य माना जाता है। आरती के दौरान घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और व्रत का समापन भावपूर्ण रूप से होता है।
जया एकादशी 2026 व्रत पारण का समय
व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण से पहले भगवान विष्णु को भोग अर्पित कर ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देने की परंपरा भी निभाई जाती है।
जया एकादशी 2026: महत्वपूर्ण समय-सारणी (स्थानीय पंचांग अनुसार)
| विवरण | समय / स्थिति |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारंभ | स्थानीय पंचांग अनुसार |
| पूजा का श्रेष्ठ समय | प्रातः ब्रह्म मुहूर्त |
| व्रत पारण | द्वादशी तिथि में |
नोट: सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग या मंदिर सूचना अवश्य देखें।







