
लालकुआँ/रूद्रपुर: तराई केन्द्रीय वन प्रभाग रूद्रपुर डिवीजन की टांडा रेंज ने अंतर्राज्यीय अवैध खैर तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा राज्य के करनाल जिले में छापेमारी की। इस दौरान केदार हर्बल इंडस्ट्रीज परिसर से 250 क्विंटल, कुल 670 नग अवैध खैर की लकड़ी बरामद की गई, जिसकी बाजार कीमत करीब दस लाख रुपये बताई जा रही है। दबिश की भनक लगते ही तस्कर मौके से फरार हो गए। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर तस्करों की तलाश तेज कर दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
तराई क्षेत्र लंबे समय से खैर तस्करों के निशाने पर रहा है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाएं सटी होने के कारण यह इलाका अवैध कटाई और लकड़ी की तस्करी के लिए सुविधाजनक माना जाता है। वन विभाग को कई दिनों से खैर की बड़ी खेप हरियाणा पहुंचाए जाने की जानकारी मिल रही थी। इसी के आधार पर मुखबिरों को सक्रिय किया गया और संयुक्त टीम तैयार की गई।
गुप्त सूचना पर कार्रवाई
वन विभाग को सूचना मिली थी कि करनाल जिले के बुटाना थाना क्षेत्र के बैरसाल गांव स्थित केदार हर्बल इंडस्ट्रीज परिसर में अवैध खैर की भारी मात्रा जमा की गई है। बताया गया था कि तस्कर जल्द ही इसे बाजार में बेचने की फिराक में हैं।
वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम, वन क्षेत्राधिकारी पूरन जोशी, एसओजी प्रभारी कैलाश तिवारी और अन्य वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। जैसे ही टीम इंडस्ट्री परिसर में दाखिल हुई, तस्करों को भनक लग गई और वे अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। टीम ने परिसर से खैर की लकड़ी लदा चौदह-टायर ट्रक UP-70-HT-2637 जब्त किया और लकड़ी को टांडा रेंज में सुरक्षित रख दिया गया।
तस्करी का नेटवर्क कैसे काम करता है
वन विभाग के अनुसार रूद्रपुर डिवीजन के जंगलों से खैर की अवैध कटाई कर तस्कर इसे यूपी की सीमा में जमा करते हैं। उसके बाद इसे ट्रकों के माध्यम से हरियाणा ले जाकर गुटखा, कत्था और औषधियों में उपयोग के लिए बेच दिया जाता है। उच्च बाजार कीमत के कारण तस्करी का यह पूरा रैकेट सक्रिय रहता है और लगातार नई रणनीतियों के साथ काम करता है।
डीएफओ की सख्त चेतावनी
डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि लंबे समय से खैर तस्करी की शिकायतें मिल रही थीं। मुखबिरों की मदद से छापेमारी की योजना बनाई गई। उन्होंने बताया कि ट्रक के कब्जे में आने से तस्करी का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है।
इंडस्ट्री परिसर से फरार हुए अभिमन्यु सिंह चौहान उर्फ ‘सैकी’ निवासी मिसरवाला, तहसील पौटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) को मुख्य आरोपी माना जा रहा है। इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है।
डीएफओ ने चेतावनी दी कि वन विभाग अवैध तस्करी के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है और इसमें शामिल सभी लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जंगलों में गश्त और बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जंगलों में अक्सर रात के समय संदिग्ध वाहन देखे जाते रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई का स्वागत किया और कहा कि खैर की अवैध कटाई से जंगलों का तेजी से क्षरण हो रहा है। कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जरूरी है, ताकि वन संपदा को बचाया जा सके।
आगे क्या?
वन विभाग ने इस रैकेट की गहन जांच शुरू कर दी है। आसपास के राज्यों—उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है। डीएफओ का कहना है कि इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
छापेमारी टीम में उप प्रभागीय वनाधिकारी शशिदेवा, मनिंदर कौर, वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम, पूरन जोशी, एसओजी प्रभारी कैलाश तिवारी, उप वन क्षेत्राधिकारी विरेंद्र परिहार और कई वनकर्मी मौजूद रहे।





