
देहरादून: होली का पर्व नज़दीक आते ही बाजारों में रंगों की रौनक बढ़ गई है, लेकिन इस उत्साह के बीच चिकित्सकों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। देहरादून स्थित दून अस्पताल के नेत्र और त्वचा रोग विभाग के विशेषज्ञों ने रसायनयुक्त रंगों से होने वाले संभावित नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि सावधानी न बरती जाए तो आंखों में एलर्जी, कॉर्निया को नुकसान और त्वचा पर संक्रमण जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं, जो त्योहार की खुशी को प्रभावित कर सकती हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
त्योहारों के दौरान बाजार में बिकने वाले कई रंगों में रसायन और कृत्रिम तत्व मिलाए जाते हैं। सस्ते और गहरे रंगों की मांग के चलते अक्सर ऐसे उत्पाद खुलेआम बिकते हैं, जिनकी गुणवत्ता की जांच नहीं होती। चिकित्सकों के अनुसार यही रंग आंखों और त्वचा के लिए सबसे अधिक हानिकारक साबित होते हैं।
दून अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज सारस्वत ने बताया कि रसायनयुक्त रंग आंखों में जाने पर एलर्जिक रिएक्शन का खतरा बढ़ा देते हैं। इसका सबसे अधिक असर कॉर्निया और कंजेक्टिवाइटा पर पड़ता है। यदि रंग के कण अंदर जाने के बाद आंखों को मसल दिया जाए तो अंदर घाव भी बन सकता है।
उन्होंने बताया कि रंग जाने के बाद आंखों में जलन, लालिमा और खुजली जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में तुरंत सावधानी बरतना जरूरी है।
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार रसायन वाले रंगों के संपर्क में आने से एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्माटाइटिस (एसीडी) हो सकता है। इससे त्वचा पर लाल दाने, तेज खुजली और त्वचा का छिलना जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य विभाग की ओर से त्योहारों के मद्देनजर लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि यदि आंख या त्वचा में तेज जलन, सूजन या संक्रमण के लक्षण दिखें तो स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें।
विशेषज्ञों ने हर्बल रंगों के उपयोग और सुरक्षात्मक उपाय अपनाने पर जोर दिया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि बाजार में बिक रहे पक्के और गहरे रंगों को लेकर वे पहले से सतर्क रहते हैं, खासकर बच्चों के मामले में। कुछ लोगों ने बताया कि पिछले वर्षों में कई बच्चों को आंखों में जलन और त्वचा पर दाने की शिकायत हुई थी, इसलिए इस बार वे हर्बल रंगों को प्राथमिकता देंगे।
ऐसे रखें आंखों की ख्याल
- हर्बल रंगों से होली खेलें
- चश्मे का इस्तेमाल करें
- रंग जाने पर आंखों को साफ पानी से धोएं
- आंखों को मसलने से बचें
ऐसे रखें त्वचा का ख्याल
- होली खेलते समय शरीर के अधिकतर अंग ढक कर रखें
- त्वचा पर पहले से मॉइस्चराइजर लगाएं
- बच्चों को पक्के और गहरे रंगों से दूर रखें
आगे क्या होगा
चिकित्सकों ने कहा है कि होली के दौरान अस्पतालों में नेत्र और त्वचा संबंधी मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। ऐसे में यदि किसी को गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर उपचार से स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है।
Rishikesh News आगे भी इस मामले की अपडेट देता रहेगा।
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