
देहरादून: उत्तराखंड में स्थित पवित्र गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने मुख्य सचिव आनंदवर्धन से मुलाकात कर आगामी तीर्थयात्रा सीजन की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की। मौसम की स्थिति और यात्रा मार्ग की परिस्थितियों का आकलन करने के बाद कपाट खोलने की तिथि पर सहमति बनी।
हेमकुंड साहिब यात्रा का संचालन ट्रस्ट राज्य सरकार के समन्वय से करता है।
तीर्थयात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, रतूड़ा, जोशीमठ, गोविंदघाट और घांघरिया में ट्रस्ट की धर्मशालाओं में मुफ्त ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाती है। हेमकुंड साहिब में भी श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था रहती है।
हालांकि गुरुद्वारा समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित होने और सीमित सुविधाओं के कारण वहां तीर्थयात्रियों को रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं दी जाती।
कम बर्फबारी के कारण यात्रा जल्दी शुरू
बताया गया कि इस वर्ष हिमालयी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बर्फबारी हुई है, जिसके कारण यात्रा मार्ग अपेक्षाकृत जल्दी खुलने की संभावना बनी। इसी को ध्यान में रखते हुए यात्रा को पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा पहले शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम काफी अनिश्चित रहता है, इसलिए यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
राज्य सरकार का पूरा सहयोग
बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंदवर्धन ने राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि चारधाम और हेमकुंड साहिब आने वाले सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व
हेमकुंड साहिब सिख धर्म के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। हिमालय की मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और ध्यान का विशेष अनुभव प्रदान करता है।
हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं, जो श्रद्धा, एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बन चुकी है।







