
हरिद्वार: उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों से डीज़ल चोरी का मामला लगातार गहराता जा रहा है। हरिद्वार क्षेत्र में एक संगठित रैकेट के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है, जो बसों से निकाले गए डीज़ल को निजी वाहनों और गैरेजों तक सप्लाई कर रहा है। यह चोरी न केवल सरकार को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि परिवहन व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के महीनों में निगम बसों में डीज़ल खपत के आंकड़े लगातार असामान्य पाए गए हैं। कई शिकायतों और आंतरिक रिपोर्टों में यह संकेत मिला कि ईंधन चोरी एक लंबे समय से चल रही संगठित गतिविधि है। हरिद्वार इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बताया जा रहा है, जहाँ से चोरी किया गया डीज़ल अलग-अलग चैनलों तक पहुँचाया जाता है।
आधिकारिक/जांच संबंधी जानकारी
सूत्रों के अनुसार, यह रैकेट बस अड्डे के आसपास और रूट के बीच पड़ने वाले सुनसान स्थानों पर सक्रिय रहता है। बसों का डीज़ल फर्जी एंट्री के माध्यम से अधिक दिखाया जाता है और बचा हुआ ईंधन चोरी कर लिया जाता है। कुछ मामलों में चालक और परिचालक बसों को निर्धारित मार्ग से थोड़ा हटाकर ड्रम या कनस्तरों में डीज़ल निकालते हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि चोरी किया गया डीज़ल ट्रकों, मैक्सियों, निजी बसों और स्थानीय गैरेजों को सस्ते दामों पर बेचा जाता है। जांच टीमों को इस बात की भी आशंका है कि विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में संगठित चोरी संभव नहीं हो सकती।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार देर रात सुनसान इलाकों में निगम बसों को संदिग्ध तरीके से खड़ा देखा है। लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं होती, जिससे इस रैकेट के बढ़ने का हौसला और बढ़ा है। यात्रियों ने भी चिंता जताई है कि ईंधन में गड़बड़ी सीधे तौर पर बस संचालन और सुरक्षा को जोखिम में डाल सकती है।
सुरक्षा और व्यवस्था पर प्रभाव
डीज़ल चोरी से आर्थिक नुकसान तो होता ही है, लेकिन इससे परिवहन निगम की संचालन क्षमता भी प्रभावित होती है। बसों का औसत माइलेज गलत दर्शाया जाता है और लंबी दूरी के रूटों पर परिचालन बाधित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं क्योंकि चोरी को छिपाने के प्रयास में कई बार निर्धारित तकनीकी जांचों को भी अनदेखा किया जाता है।
आगे क्या?
परिवहन विभाग पर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग बढ़ गई है। विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है, लेकिन अभी तक चोरी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है और आवश्यक होने पर विशेष टीम गठित कर रैकेट का पर्दाफाश किया जाएगा।




