
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में जो कुछ भी हो रहा है, वह ठीक वही है जो वह लंबे समय से चाहते थे। उन्होंने खुद को एक दृढ़ राजनीतिक कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि भले ही उनकी पीएचडी मिलिट्री साइंस में हो, लेकिन राजनीति की समझ उन्होंने अपने विस्तृत अनुभव और संघर्षों से हासिल की है। बातचीत के दौरान उन्होंने राजनीतिक विरोधियों और विशेष रूप से बीजेपी नेताओं पर तीखे तंज भी कसें।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हरक सिंह रावत उत्तराखंड राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। हाल के दिनों में उनके राजनीतिक भविष्य और संभावित निर्णयों को लेकर मीडिया में कई चर्चाएँ तेज़ हो गई थीं। इसी परिप्रेक्ष्य में रावत ने आज मीडिया से अपनी स्पष्ट राय साझा की।
आधिकारिक जानकारी
रावत ने कहा कि वह छात्र राजनीति से आए हैं और राजनीतिक जीवन में संघर्ष करना उन्होंने बहुत पहले सीख लिया था। उनका कहना था कि राजनीति उनके लिए केवल पद या प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है जिसमें अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगातार चर्चाएँ और टिप्पणियाँ होती रहती हैं, लेकिन इन सबके बीच उनका नाम बिना किसी प्रचार खर्च के सुर्खियों में बना हुआ है। उन्होंने इस पर व्यंग्य करते हुए कहा कि मीडिया चाहे विरोध में लिखे या पक्ष में, उन्हें चर्चा में बनाए रखने के लिए वह मीडियाकर्मियों के आभारी हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राज्य की राजनीति पर नज़र रखने वाले कुछ लोगों का कहना है कि हरक सिंह रावत का यह बयान चुनावी माहौल से पहले राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकता है। कई समर्थक सोशल मीडिया पर उनके पक्ष में पोस्ट साझा कर रहे हैं, वहीं विरोधी उनके बयानों को राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रहे हैं।
विपक्ष पर हमला
बीजेपी नेताओं पर निशाना साधते हुए रावत ने कहा कि जितनी बार बीजेपी उन्हें गिराने की कोशिश करेगी, वह उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनके खिलाफ लिखते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में भी लिखते और बोलते हैं। उनका कहना था कि विरोध उनके राजनीतिक सफर को रोकने के बजाय और तेज़ कर देता है।
आगे क्या
रावत के हालिया बयान से राज्य की राजनीतिक हलचल और तेज हो सकती है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में वह किसी अहम राजनीतिक निर्णय या नई भूमिका में दिखाई दे सकते हैं। उनके समर्थक भी नए राजनीतिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।







