
कोटद्वार: विकासखंड अंतर्गत गुजराड़ी गांव में बंदर, लंगूर और जंगली सुअरों का उत्पात बढ़ने से किसान परेशान हैं। जंगली जानवरों द्वारा गेहूं, आलू, प्याज, लहसुन और सब्जियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे काश्तकारों को भारी आर्थिक क्षति हो रही है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गुजराड़ी गांव के करीब एक दर्जन परिवार खेती पर निर्भर हैं। किसान बाजार से 20–30 रुपये प्रति किलो की दर से आलू का बीज खरीदकर लगाते हैं, लेकिन जंगली जानवरों के कारण पूरी फसल नष्ट हो जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बंदर और लंगूर न केवल खेतों में नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि घरों की छतों पर उछल-कूद कर पठाल तोड़ देते हैं, जिससे बरसात में पानी टपकने लगता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
वन पंचायत सरपंच सुनीता देवी और ग्रामीणों चंद्रपाल सिंह, मनोहर सिंह, साधना देवी, सावित्री देवी, मनीषा देवी ने बताया कि अमरूद और आम जैसे फलदार पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे नुकसान के कारण कुछ लोग खेती छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर हो रहे हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी राजवीर सिंह ने कहा कि घेराबाड़ के लिए फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं है। यदि ग्रामीण क्षेत्रीय विधायक के माध्यम से जिला योजना में प्रस्ताव भेजते हैं, तो बजट मिलने की संभावना बनेगी।
वन क्षेत्राधिकारी अनुराग जोशी ने बताया कि बंदरों को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगाया जाएगा और टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा
ग्रामीणों ने शीघ्र राहत की मांग की है। वन विभाग द्वारा पिंजरा लगाने और निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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