
देहरादून: उत्तराखंड पर्यटन की प्रमुख इकाई गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) गहरे वित्तीय संकट में फंस गया है। सचिवालय प्रशासन और राज्य संपत्ति विभाग द्वारा करीब 19 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी न चुकाए जाने से निगम अब कर्मचारियों का वेतन और EPF जमा करने की स्थिति में भी नहीं बचा है। लगातार पत्राचार के बावजूद विभागों के जवाब न आने से कर्मचारियों में बेहद नाराज़गी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
GMVN लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गई है। पर्यटन आधारित आय कोरोना काल के बाद से लगातार प्रभावित रही है। ऐसे में सरकारी विभागों द्वारा भुगतान न मिलना निगम की आर्थिक रीढ़ को और कमजोर कर रहा है।
GMVN का कहना है कि बकाया भुगतान मिलने पर ही EPF और कर्मचारी सुविधाएँ पटरी पर आ सकती हैं।
आधिकारिक जानकारी
GMVN के अनुसार सचिवालय प्रशासन और राज्य संपत्ति विभाग पर कुल 19 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसमें
- 14.59 करोड़ रुपये सचिवालय प्रशासन,
- 4.49 करोड़ रुपये राज्य संपत्ति विभाग के हैं।
निगम के MD विशाल मिश्रा ने बताया कि EPF में 16 करोड़ रुपये की जमा राशि अटकी है, जिसकी वजह से कर्मचारी PF से लोन, अग्रिम या निकासी जैसी सुविधाएँ नहीं ले पा रहे।
उन्होंने कहा कि विभागों से कई बार पत्राचार किया गया है, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं मिल पाया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
GMVN कर्मचारियों में इस स्थिति को लेकर भारी असंतोष है। कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष राजेश चंद्र रमोला ने कहा कि वर्षों से बकाया का भुगतान न होना कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी घर, इलाज और आवश्यक जरूरतों के लिए PF से पैसा निकालना चाहते थे, लेकिन फंड जमा न होने से सभी प्रक्रियाएं रुक गई हैं। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन की राह पर जाना मजबूरी होगी।
विशेषज्ञ / प्रशासनिक प्रतिक्रिया
राज्य संपत्ति विभाग के सचिव रणवीर सिंह चौहान ने कहा कि देनदारी भुगतान प्रक्रिया जारी है और GMVN को बकाया जल्द चुकाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वहीं प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सरकारी विभागों द्वारा लंबे समय तक भुगतान रोके रखना न केवल निगम की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र पर भी सीधा असर डालता है।
आगे क्या?
GMVN के प्रबंध निदेशक ने बताया कि कर्मचारियों के हितों को देखते हुए EPF की राशि किसी अन्य माध्यम से जमा कराने की संभावना भी खंगाली जा रही है।
हालांकि निगम का कहना है कि जब तक बकाया भुगतान नहीं मिलता, स्थायी समाधान संभव नहीं है। सरकार द्वारा हस्तक्षेप और समय पर देनदारी भुगतान ही इस संकट को रोक सकता है, अन्यथा निगम की वित्तीय स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।






