
कर्णप्रयाग (चमोली): विकासखंड के राजकीय इंटर कॉलेज उज्जवलपुर में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिए शिक्षा से ज्यादा चिंता अब अपनी जान की सुरक्षा को लेकर है। स्कूल भवन की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और बीम दीवारों से छिटकने लगे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अभिभावकों का कहना है कि भवन को ध्वस्त करने के आदेश पहले ही हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
राजकीय इंटर कॉलेज उज्जवलपुर में सेम, तोप, भटोली, खगेली, रामधार और सिरोली समेत आसपास के गांवों के 115 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। वर्ष 2002 में उप्र निर्माण निगम द्वारा यहां 16 कमरों और शौचालय सहित दोमंजिला भवन का निर्माण किया गया था, लेकिन निर्माण के बाद से ही भू-धंसाव के कारण भवन क्षतिग्रस्त होने लगा। इसी वजह से यह भवन शिक्षा विभाग को हैंडओवर भी नहीं किया जा सका।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
खंड शिक्षा अधिकारी कर्णप्रयाग विनोद सिंह मटूड़ा ने बताया कि जीआईसी उज्जवलपुर के जर्जर भवन को ध्वस्त करने के आदेश दिए जा चुके हैं। इसके लिए वित्तीय स्वीकृति की मांग की गई है। स्वीकृति मिलने के बाद भवन को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नए भवन निर्माण के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये का इस्टीमेट भेजा गया है, जिसकी मंजूरी के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
अभिभावक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सगोई का कहना है कि भवन की दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और बीम बाहर की ओर निकल रहे हैं। उनका कहना है कि यह जर्जर भवन किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है। अभिभावकों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर बच्चों की जान को सुरक्षित करने की मांग की है।
आंकड़े और तथ्य
भवन के खतरनाक हो जाने के कारण कक्षाएं अब जूनियर हाईस्कूल के लिए बने दो टिन शेड के छोटे कमरों में संचालित की जा रही हैं। विद्यालय में प्रयोगशाला के लिए कोई अलग कक्ष नहीं है। स्टाफ रूम, पुस्तकालय, कार्यालय, प्रधानाचार्य कक्ष और कंप्यूटर कक्ष एक ही हॉल में चल रहे हैं, जिन्हें अलमारियों के सहारे विभाजित किया गया है।
आगे क्या होगा
शिक्षा विभाग के अनुसार वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद जर्जर भवन को ध्वस्त कर नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। तब तक विद्यालय सीमित संसाधनों और अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित होता रहेगा, लेकिन अभिभावकों और ग्रामीणों की मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।
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